नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: धान खरीदी से पहले बंद कमरों में बैठकर किसानों का रकबा काटने और धान की जगह पड़त चढ़ाने वाले पटवारियों की मनमानी पर अब तकनीकी चाबुक चल गया है। एग्रीस्टैक डिजिटल फसल सर्वेक्षण प्रणाली ने गिरदावरी को सार्वजनिक कर दिया है। अब किसान घर बैठे मोबाइल से पटवारी की कारस्तानी पकड़कर सीधे आनलाइन आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।
कई मामलों में लहलहाती धान की फसल वाले रकबे को कागजों में पड़त या अन्य फसल दर्ज कर दिया जाता था, जिससे किसान का धान बेचने का कोटा घट जाता था। टोकन कटवाते वक्त जब यह गड़बड़ी सामने आती थी, तब तक सुधार की समय-सीमा बीत चुकी होती थी और किसान तहसील कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हो जाते थे।
शासन द्वारा जारी डिजिटल फसल सर्वेक्षण पोर्टल ने इस सिंडिकेट पर सीधा प्रहार किया है। अब जिले के बिल्हा, मस्तूरी, कोटा और तखतपुर विकासखंडों के किसान अपनी जमीन का खसरा नंबर डालकर खुद देख सकते हैं कि हल्का पटवारी ने उनके खेत में कौन सी फसल दर्ज की है।
यदि खेत में धान होने के बावजूद रिकार्ड में रकबा घटाया गया है, तो किसान तत्काल आनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं। डिजिटल साक्ष्य दर्ज होने के कारण राजस्व अमले को तय समय में खेत पहुंचकर भौतिक सत्यापन करना अनिवार्य होगा, जिससे धान खरीदी में गड़बड़ी की गुंजाइश खत्म होगी।
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ऐसे बेनकाब होगा पटवारी का खेल: पांच मिनट में जांचें खसरा
किसान पोर्टल पर जाकर जिले, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल व पटवारी हल्का नंबर का चयन करें। इसके बाद गांव और अपने खेत का खसरा नंबर दर्ज करते ही स्क्रीन पर दर्ज फसल का ब्योरा सामने आ जाएगा। यदि मौके पर धान बोया है और पोर्टल पर पड़त या रकबा कम दिखता है, तो तुरंत समझ जाएं कि पटवारी ने खेल कर दिया है।
पोर्टल पर ऐसे दर्ज कराएं आपत्ति, तय समय में होगा सुधार
खसरे में दर्ज विवरण गलत मिलने पर किसान उसी पोर्टल के शिकायत निवारण विकल्प पर क्लिक करें। वहां अपना मोबाइल नंबर व विसंगति का कारण दर्ज कर आवेदन सबमिट करें। शिकायत दर्ज होते ही संदर्भ क्रमांक मिलेगा। इसके बाद राजस्व अमले को मौके पर पहुंचकर अनिवार्य रूप से दोबारा भौतिक पड़ताल करनी होगी और धान खरीदी से पहले रिकार्ड में सुधार करना पड़ेगा।
वर्जन
डिजिटल क्राप सर्वे पोर्टल के माध्यम से गिरदावरी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया गया है। किसान स्वयं अपने खसरे में दर्ज फसल और रकबे की पुष्टि कर सकते हैं। यदि किसी भी किसान को प्रविष्टि में त्रुटि लगती है, तो वे पोर्टल पर आनलाइन दावा-आपत्ति दर्ज कराएं। राजस्व अमले द्वारा भौतिक सत्यापन कर धान खरीदी से पूर्व सभी त्रुटियों का निराकरण किया जाएगा।
संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर