
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। स्व. बनारसी राम के सेवानिवृत्ति देयकों और उत्तराधिकार प्रमाणपत्र को लेकर उनकी गोद ली बेटी अल्का नागेशिया और भतीजे अवधेश कुमार के बीच चल रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत दी है।
न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत ने प्रथम जिला न्यायाधीश, रामानुजगंज के अतिरिक्त न्यायाधीश द्वारा 18 अगस्त 2026 को पारित आदेश के प्रभाव और संचालन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य को निर्देश दिया है कि तब तक सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान अल्का नागेशिया या अवधेश कुमार, किसी के पक्ष में न किया जाए।
मामला अल्का नागेशिया विरुद्ध अवधेश कुमार का है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता पुष्कर सिन्हा ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
स्व. बनारसी राम की 2 मार्च 2020 को सेवा में रहते मृत्यु हुई थी। उनकी पत्नी सोनिया बाई का भी 19 सितंबर 2020 को निधन हो गया। इसके बाद सेवानिवृत्ति देयकों के लिए उत्तराधिकार प्रमाणपत्र हासिल करने अवधेश कुमार ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 की धारा 372 के तहत रामानुजगंज के प्रथम व्यवहार न्यायाधीश (वरिष्ठ श्रेणी) के समक्ष आवेदन किया था। यह उत्तराधिकार प्रकरण दर्ज हुआ।
25 मार्च 2025 को व्यवहार न्यायाधीश ने आवेदन खारिज करते हुए माना था कि अल्का नागेशिया, जो बनारसी राम की दत्तक पुत्री है, उनकी एकमात्र उत्तराधिकारी है और वही देयकों की हकदार है।
इस आदेश के खिलाफ अवधेश कुमार ने भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 388(2) के तहत अपील की। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, रामानुजगंज ने सिविल अपील में 18 अगस्त 2026 को अपील स्वीकार करते हुए निचली अदालत का आदेश पलट दिया। इसके खिलाफ अल्का नागेशिया ने हाई कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की।
सुनवाई में अल्का की ओर से कहा गया कि वह मृतक की दत्तक पुत्री है, जबकि अवधेश उनके भाई का बेटा है। अपीलीय अदालत ने बिना ठोस एवं विश्वसनीय साक्ष्य के व्यवहार न्यायालय के निष्कर्षों को बदल दिया है।
हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद प्रथमदृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष में मामला पाया और अपीलीय अदालत के 18 अगस्त के आदेश के प्रभाव पर रोक लगा दी। कोर्ट ने उत्तराधिकार प्रकरण और सिविल अपील का रिकॉर्ड भी तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 को होगी।