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बेटी की प्रताड़ना से परेशान डॉक्टर पहुंचे CG हाई कोर्ट, एसडीएम को 30 दिन में फैसला करने के निर्देश

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश कवर्धा निवासी 62 वर्षीय वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. गोवर्धन सिंह ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के ...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 16 Jul 2026 08:37:55 AM (IST)Updated Date: Thu, 16 Jul 2026 09:06:25 AM (IST)
बेटी की प्रताड़ना से परेशान डॉक्टर  पहुंचे CG हाई कोर्ट, एसडीएम को 30 दिन में फैसला करने के निर्देश

HighLights

  1. बेटी की प्रताड़ना से परेशान बुजुर्ग डॉक्टर की याचिका पर हाई कोर्ट सख्त
  2. कवर्धा के गोराज हॉस्पिटल के डॉक्टर को 7 महीने नहीं मिला इंसाफ
  3. एसडीएम कवर्धा को ३० दिन का अल्टीमेटम

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बेटी की कथित प्रताड़ना से परेशान एक वरिष्ठ चिकित्सक को आखिरकार अपनी शिकायत के निस्तारण के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कवर्धा के अनुविभागीय दंडाधिकारी को निर्देश दिया है कि यदि शिकायत अब तक लंबित है तो सभी पक्षों को सुनने के बाद 30 दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करें।

न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने यह आदेश कवर्धा निवासी 62 वर्षीय वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डा. गोवर्धन सिंह ठाकुर की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। डा. गोवर्धन सिंह ठाकुर कवर्धा स्थित गोराज चिल्ड्रेन हास्पिटल का संचालन करते हैं और वहीं निवास भी करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी 31 वर्षीय पुत्री रश्मि सिंह ठाकुर की ओर से लगातार विवाद और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।


इससे परेशान होकर उन्होंने 10 दिसंबर 2025 को माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत एसडीएम, कवर्धा के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत पर संज्ञान लेकर नोटिस भी जारी किया गया, लेकिन करीब सात माह बीतने के बाद भी अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया। इससे व्यथित होकर उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से कहा गया कि यदि शिकायत अभी भी लंबित है तो उसका शीघ्र निपटारा कानून के अनुसार किया जाएगा।

एसडीएम कारणयुक्त आदेश पारित करें

हाई कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक अधिनियम, 2007 की धारा 5(4) के तहत ऐसे मामलों का निपटारा सामान्यतः 90 दिनों में और विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 30 दिन के अतिरिक्त समय में किया जाना चाहिए। अदालत ने एसडीएम, कवर्धा को निर्देश दिया कि यदि शिकायत अब भी लंबित है तो प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर सभी पक्षों को सुनकर कानून के अनुरूप कारणयुक्त आदेश पारित करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

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