
नईदुनिया बिलासपुर। रतनपुर महामाया पारा निवासी 75 वर्षीय बुजुर्ग के साथ जमीन खरीदी-बिक्री के नाम पर लाखों रुपये की धोखाधड़ी हो गई। पीड़ित सोमवार को कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की लिखित गुहार लगाई है।
रतनपुर महामाया पारा निवासी झगरू निर्मलकर ने बताया कि उनके कब्जे और पट्टे की जमीन का सौदा मोहल्ले के ही रामकुमार निर्मलकर ने 4 लाख रुपये में किया था। सौदे के वक्त रामकुमार ने 2 लाख रुपये नगद दिए और बाकी रकम 4 महीने में देने का वादा किया, जिसकी गारंटी तत्कालीन पार्षद पति संतोष प्रजापति ने भी ली थी। लेकिन कुछ दिन बाद रामकुमार ने जमीन लेने से इनकार कर दिया और अपने पैसे वापस मांगने लगा। इसके बाद पार्षद पति संतोष प्रजापति ने मिलीभगत कर बुजुर्ग की बहन फेकन बाई से 4 लाख रुपये दिलवाए और रामकुमार को सौंप दिए। पैसे मिलते ही रामकुमार वहां से भाग गया और पार्षद पति संतोष प्रजापति ने लिखा-पढ़ी के स्टांप पेपर को सरेआम फाड़ दिया।
पीड़ित का आरोप है कि रामकुमार, पार्षद पति संतोष प्रजापति और खुद उनकी बहन फेकन बाई ने आपस में मिलीभगत कर उनके साथ जमीन का फर्जीवाड़ा किया और रकम हड़पली। रतनपुर थाने में शिकायत करने के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो बेसाहाय बुजुर्ग को न्याय के लिए बिलासपुर के आला अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ा।
पार्षद पति ने फाड़ दिए लिखा-पढ़ी के स्टांप पेपर
पीड़ित बुजुर्ग झगरू निर्मलकर ने शिकायत में आरोप लगाया है कि इस पूरे फर्जीवाड़े के मुख्य सूत्रधार पार्षद पति संतोष प्रजापति हैं। उन्होंने न केवल बाकी रकम दिलाने की झूठी गारंटी ली, बल्कि जैसे ही रामकुमार को 4 लाख रुपये सौंपे गए, उन्होंने धोखाधड़ी के सबूत मिटाने की नीयत से समझौते के स्टांप पेपर को मौके पर ही फाड़कर फेंक दिया।
अपनों ने ही रचा चक्रव्यूह, बेसाहाय हुआ वृद्ध
जमीन घोटाले का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इसमें पीड़ित बुजुर्ग की सगी बहन फेकन बाई भी आरोपितों के साथ शामिल है। अपनों और रसूखदारों के इस चक्रव्यूह में फंसकर 75 वर्षीय गरीब वृद्ध पाई-पाई के लिए बेसाहाय हो चुका है। बुजुर्ग ने मांग की है कि इन जालसाजों पर कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि किसी और गरीब के साथ ऐसा न्याय न हो।
पढ़िए क्या है मामला —
सबूत मिटाने की साजिश: रसूखदार पार्षद पति संतोष प्रजापति ने न केवल आधी रकम दिलाने की झूठी गारंटी ली, बल्कि जालसाजी छिपाने के लिए गवाहों के सामने ही इकरारनामे का स्टांप पेपर फाड़ दिया।
रतनपुर पुलिस की निष्क्रियता: पीड़ित द्वारा स्थानीय थाने में बार-बार चक्कर लगाने और नामजद लिखित शिकायत देने के बावजूद पुलिस ने आरोपियों को राजनीतिक दबाव के चलते गिरफ्तार नहीं किया।
गरीब की जीवनभर की कमाई साफ: पट्टे की जिस जमीन के सहारे बुजुर्ग अपने जीवन का अंतिम पड़ाव काटने की सोच रहे थे, उसे अपनों ने ही दस्तावेजों में हेरफेर कर कौड़ियों के भाव बेच दिया।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश: बिलासपुर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए रतनपुर अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और पुलिस को तीन दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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