
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। धान खरीदी केंद्रों में इन दिनों कर्मचारी बिचौलियों के साथ मिलकर धान की खुली लूट कर रहे हैं। यह खेल तौल में चोरी का है। धान खरीदी केंद्रों के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी बिचौलियों के साथ मिलकर एक संगठित तंत्र चला रहे हैं, जिसमें तौल कांटे पर ही किसानों की मेहनत का हिस्सा काट लिया जाता है।
प्रशासन की हालिया छापेमारी में सामने आए तथ्य चौंकाने वाले हैं। किसानों से तय मानक से अधिक धान लिया जा रहा है और इस अतिरिक्त धान को बाद में बिचौलियों या फर्जी खातों के माध्यम से खपाकर सरकारी खजाने में सेंध लगाई जा रही है।
अधिकारियों की जांच में यह पुष्टि हुई है कि केंद्रों के कर्मचारी तौल के समय प्रति बोरी 500 ग्राम से एक किलो तक अतिरिक्त धान अवैध रूप से वसूल रहे हैं। हजारों बोरियों की खरीदी के बाद यह मात्रा कई क्विंटल में बदल जाती है। चूंकि इस अतिरिक्त धान का कोई आधिकारिक रिकार्ड नहीं होता, इसलिए यहीं से बिचौलियों की एंट्री होती है।
नाम पर फर्जी खाते
जिन किसानों का रकबा शेष बच जाता है या जिनके नाम पर फर्जी खाते होते हैं, चोरी किया गया अतिरिक्त धान उन्हीं के नाम पर चढ़ा दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में कर्मचारी और बिचौलिए आपस में मुनाफे की बंदरबांट करते हैं।
प्रशासन की विशेष टीमों ने मंडियों में जब औचक छापेमारी की, तो यह साठगांठ रंगे हाथों पकड़ी गई। गतौरा और घुटकू खरीदी केंद्रों में चल रहे इस खेल का खुलासा तब हुआ, जब अधिकारियों को तौल में विसंगति मिली। इसके साथ ही खाली बारदानों और रकबा खपाने की साजिश का भी पर्दाफाश हुआ।
जिला प्रशासन ने अब तक दो केंद्रों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रभारियों को निलंबित कर दिया है। वहीं, आधा दर्जन अन्य केंद्रों के रिकार्ड की सघन जांच चल रही है। कलेक्टर के सख्त निर्देश हैं कि अब केवल निलंबन नहीं, बल्कि किसानों के हक पर डाका डालने वालों पर सीधे प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
रडार पर सिस्टम के संदिग्ध मोहरे
प्रशासन अब उन आपरेटरों और प्रभारियों की कुंडली खंगाल रहा है, जिनके केंद्रों पर आवक से अधिक स्टाक या संदिग्ध रकबा समर्पण दर्शाया गया है। जांच दल यह भी देख रहा है कि तौल के दौरान डिजिटल कांटों से कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नामों पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।
किसानों का हक मारना गंभीर अपराध
सीएस जायसवाल, उपायुक्त सहकारिता का कहना है कि "तौल में चोरी कर किसानों का हक मारना गंभीर अपराध है। गतौरा और घुटकू में प्रारंभिक कार्रवाई की गई है, लेकिन यह केवल शुरुआत है। हमारी टीमें हर मंडी में तैनात हैं। बिचौलियों से साठगांठ करने वाले कर्मचारियों को न केवल बर्खास्त किया जाएगा, बल्कि उनसे पूरी वसूली कर जेल भी भेजा जाएगा।"