17 करोड़ के सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच अब विशेषज्ञ एजेंसी करेगी: डीजीपी
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए बिलासपुर प्रवास के दौरान बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा घोटाले को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि मामले की संवेदनशीलता और इसमें शामिल वित्तीय अनियमितताओं को देखते हुए राज्य शासन इसकी जांच किसी विशेषज्ञ एजेंसी को सौंपने जा रहा है। यह एजेंसी आर्थिक अपराधों की जांच में विशेष रूप से सक्षम है।
जिले में दुर्घटना, फांसी, सामान्य मौत और जहर सेवन जैसे मामलों को सर्पदंश बताकर 17 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा घोटाला किया गया है। राजस्व अधिकारियों की जांच के बाद 17 अलग-अलग मामलों में एफआइआर दर्ज की गई थी। मामले में अब तक 21 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें सिम्स की एक चिकित्सक, सिम्स चौकी में पदस्थ दो नगर सैनिक, तहसील कार्यालय के तीन लिपिक, तहसीलदार का ड्राइवर, अधिवक्ता और वे स्वजन शामिल हैं, जिनके खातों में घोटाले की रकम ट्रांसफर की गई थी।
डीजीपी ने बिलासपुर पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिलासपुर पुलिस के सामने जो तथ्य आए, उन्होंने पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ उसकी तफ्तीश की है। हालांकि, यह एक अत्यंत गंभीर और बड़ा मसला है, इसलिए आगे की विवेचना के लिए विशेषज्ञों की राय और विशेषज्ञ जांच एजेंसी की आवश्यकता महसूस की गई है।
आरोप है कि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से बिना आवेदक के उपस्थित हुए ही कई मामलों में मुआवजा राशि सीधे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। पुलिस अब तहसीलदार, पटवारी और अन्य लिपिकों के बयान दर्ज करने की तैयारी में है। मामले के कुछ आरोपित अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
जांच में राजस्व अधिकारियों व अधिवक्ताओं की भूमिका संदिग्ध
सर्पदंश मुआवजे के नाम पर हुए 17 करोड़ के घोटाले में राजस्व विभाग और अधिवक्ताओं की कार्यप्रणाली कटघरे में है। बिना आवेदक के सत्यापन और बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए मुआवजा राशि सीधे खातों में जमा कर दी गई। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि किन राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से यह प्रक्रिया पूरी की गई।
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जल्द शिकंजे में होंगे फरार आरोपित
सर्पदंश मामले में सिम्स की चिकित्सक से लेकर लिपिकों और नगर सैनिकों तक की गिरफ्तारी हो चुकी है। लेकिन, अभी भी मामले से जुड़े कई आरोपित फरार हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विशेषज्ञ एजेंसी की जांच शुरू होते ही फरार आरोपितो के नेटवर्क का पर्दाफाश होगा और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
बिलासपुर पुलिस ने जो केस उनके सामने आया, उसकी ईमानदारी और पारदर्शी ढंग से तफ्तीश की है। चूंकि यह एक बड़ा मसला है, इसलिए उसकी विवेचना के लिए राज्य शासन ने अनुशंसा की है कि इसे एक एक्सपर्ट एजेंसी से कराया जाए, जो आर्थिक अपराधों की विवेचना के लिए ज्यादा सक्षम है। अरुण देव गौतम, डीजीपी छत्तीसगढ़