बिलासपुर में गर्भवती महिला से दुर्व्यवहार मामले में फाइनेंस कंपनी के तीन कर्मचारियों पर एफआइआर
बिलासपुर के एसएसपी कार्यालय के सामने नेहरू चौक पर एक गर्भवती महिला की कार को जबरन रोककर क्रेन से टो करने और दुर्व्यवहार करने के मामले में सिविल लाइन पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के तीन कर्मचारियों खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।
Publish Date: Wed, 15 Jul 2026 08:39:27 AM (IST)Updated Date: Wed, 15 Jul 2026 08:39:27 AM (IST)
महिला की कार को जबरन रोककर क्रेन से टो करने की कोशिशHighLights
- कार के भीतर तड़पती रही गर्भवती, क्रेन से गाड़ी खींचते रहे रिकवरी एजेंट
- फाइनेंस कर्मियों की प्रताड़ना से गर्भस्थ शिशु की हलचल हुई कम
- बिलासपुर सिविल लाइन पुलिस ने तीन फाइनेंस कर्मियों पर दर्ज की एफआईआर
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: एसएसपी कार्यालय के सामने गर्भवती महिला की कार को जबरन रोककर क्रेन से टो करने की कोशिश और दुर्व्यवहार के मामले में सिविल लाइन पुलिस ने फाइनेंस कंपनी के तीन कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है। महिला की शिकायत, घटना के वीडियो और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी है।
मंगला स्थित दीनदयाल कालोनी में रहने वाली प्रिया ठाकुर ने अपनी शिकायत में बताया कि 11 जुलाई की दोपहर करीब तीन बजे वह अपने पति अंकित सिंह और मां के साथ स्कार्पियो से अस्पताल जांच कराने जा रही थीं। नेहरू चौक स्थित मल्टीलेवल पार्किंग के पास पहुंचते ही फाइनेंस कंपनी से जुड़े सिद्धार्थ अग्रवाल, निशांत गुप्ता और सोहेल अख्तर ने उनकी गाड़ी रुकवा ली।
महिला का आरोप है कि कर्मचारियों ने वाहन की बकाया किस्त का हवाला देते हुए गाड़ी जब्त करने की बात कही। उन्होंने कर्मचारियों को अपनी गर्भावस्था और अस्पताल जाने की जानकारी देते हुए भरोसा दिलाया कि एक घंटे के भीतर बकाया किस्त जमा कर दी जाएगी। शिकायत के अनुसार तय समय के भीतर परिवार ने किस्त की राशि जमा भी कर दी, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों ने वाहन छोड़ने से इनकार कर दिया।
प्रिया ठाकुर ने आरोप लगाया कि किस्त जमा होने के बाद भी कर्मचारियों ने क्रेन बुलाकर कार को टो करने का प्रयास किया। उस समय वह कार के अंदर ही बैठी थीं, फिर भी वाहन को झटका देकर खींचा गया, जिससे उनके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारियों ने अतिरिक्त खर्च के नाम पर रुपए मांगे और विरोध करने पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
घटना के दौरान महिला ने डायल-112 पर काल कर पुलिस को बुलाया। पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद कर्मचारियों ने वाहन छोड़ा। महिला का कहना है कि पूरे घटनाक्रम में करीब डेढ़ घंटे तक उनका परिवार सड़क पर परेशान होता रहा, जिससे समय पर डाक्टर से जांच नहीं हो सकी। बाद में अस्पताल में जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु की हलचल सामान्य से कम मिलने पर उन्हें भर्ती किया गया और बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर करने की भी सलाह दी गई।
घटना का वीडियो भी महिला ने अपने मोबाइल फोन में रिकार्ड किया, जिसे पुलिस को सौंप दिया गया है। सिविल लाइन पुलिस वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। पुलिस ने सिद्धार्थ अग्रवाल, निशांत गुप्ता और सोहेल अख्तर के खिलाफ बीएनएस की धारा 296, 126, 351(3) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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