
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। 59 प्रतिशत श्रवण दिव्यांगता के आधार पर छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा संवर्ग में नियुक्त अरविंद कुमार पटेल को नियुक्ति के दो साल बाद जारी कारण बताओ नोटिस पर हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने 1 सितंबर 2026 को जारी नोटिस के प्रभाव और क्रियान्वयन को अगली सुनवाई तक रोक दिया है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।
अरविंद कुमार पटेल की नियुक्ति 13 जून 2024 को कोष, लेखा एवं पेंशन विभाग के अधीन छत्तीसगढ़ अधीनस्थ लेखा सेवा संवर्ग में दिव्यांग श्रेणी के उम्मीदवार के रूप में हुई थी। उनकी श्रवण दिव्यांगता 59 प्रतिशत बताई गई है।
नियुक्ति से पहले उनके दिव्यांगता प्रमाणपत्र का सत्यापन कराया गया था और जिला चिकित्सा मंडल ने भी उनकी दिव्यांगता की जांच कर प्रमाणित किया था। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमृतो दास ने बताया कि नियुक्ति और सेवा में शामिल होने के बाद छत्तीसगढ़ राज्य चिकित्सा मंडल की 3 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के आधार पर 1 सितंबर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। इसमें पूछा गया था कि उनके खिलाफ प्राथमिकी क्यों दर्ज न की जाए और उनकी सेवाएं समाप्त क्यों न की जाएं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नियुक्ति से पहले सक्षम चिकित्सा अधिकारियों ने उनकी दिव्यांगता की जांच और प्रमाणन किया था। ऐसे में बाद की रिपोर्ट के आधार पर सीधे प्राथमिकी और सेवा समाप्ति की कार्रवाई की चेतावनी देना उचित नहीं है।
हाई कोर्ट ने याचिका के साथ पेश दस्तावेजों में नियुक्ति से पहले जिला चिकित्सा मंडल समेत सक्षम चिकित्सा अधिकारियों द्वारा की गई जांच और प्रमाणन को देखते हुए अंतरिम राहत को उचित माना। कोर्ट ने राज्य को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का समय दिया और 1 सितंबर के कारण बताओ नोटिस के प्रभाव पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी।
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