कस्टम मिलिंग और शराब घोटाले में पूर्व आईएएसस अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर सहित चार को हाई कोर्ट से मिली जमानत
अलग-अलग राइस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता रहा। घोटाले में ईओडब्ल्यू ने अनवर ढेबर और अनिल टुटे ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 13 Jan 2026 08:21:01 PM (IST)Updated Date: Tue, 13 Jan 2026 08:26:12 PM (IST)
कस्टम मिलिंग मामले में हुई सुनवाई।नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कस्टम मिलिंग घोटाला में हाई कोर्ट ने कारोबारी अनवर ढेबर, पूर्व आइएएस अनिल टुटेजा को जमानत दे दी है। शराब घोटाला में मुकेश मनचंदा और अतुल सिंह को भी जमानत मिली है। कस्टम मिलिंग घोटाले में ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज किया था, जिस पर ढेबर और टूटेजा को मंगलवार को कोर्ट ने जमानत दे दी है।
छत्तीसगढ़ में कस्टम मिलिंग घोटाला 140 करोड़ रुपये से अधिक का है। आरोप है कि 140 करोड़ रुपये से ज्यादा की अवैध वसूली की गई है। घोटाले में अफसर से लेकर मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी शामिल हैं।
अलग-अलग राइस मिलर्स के द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम और एफसीआई में कस्टम मिलिंग का चावल जमा किया जाता रहा। घोटाले में ईओडब्ल्यू ने अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को अरोपी बनाया है। दोनों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने मामला दर्ज कर कोर्ट में चालान पेश किया था।
मिलरों से वसूला लेवी
- ईओडब्ल्यू ने फरवरी 2025 में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ ईओडब्ल्यू द्वारा कस्टम मिलिंग घोटाले में पहला चालान प्रस्तुत किया गया था।
- कस्टम मिलिंग में राइस मिलों से अवैध वसूली की गई थी। अवैध वसूली से 20 करोड़ रुपये हड़प लिए।
- राइस मिलरों से अवैध वसूली करने के लिए मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों पर दबाव बनाकर बिल लंबित रखा जाता था, जिससे राइस मिलर दबाव में आकर 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कमीशन लेते थे।
- कारोबारी अनवर ढेबर 2022 से 2023 तक राजनीतिक रूप से प्रभावशाली रहे।
- आयकर विभाग के छापे के दौरान प्राप्त डिजिटल साक्ष्य से इस बात के प्रमाण मिले थे कि वह न केवल शराब घोटाला बल्कि तत्कालीन सरकार के समय अन्य महत्वपूर्ण विभाग जैसे पीडब्ल्यूडी व वन विभाग में भी दखल रखते थे।