
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः ग्रामीण अंचलों के हर घर तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का सरकारी दावा पूरी तरह हवा-हवाई साबित हो रहा है। विभागीय सुस्ती और ठेकेदारों की मनमानी के चलते ग्रामीणों की प्यास बुझाने में पूरा सिस्टम नाकाम नजर आ रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के ताजा आंकड़ों ने ही जल जीवन मिशन की पोल खोलकर रख दी है, जहां आज भी 53 हजार से अधिक ग्रामीण परिवार नल कनेक्शन की राह निहार रहे हैं।
विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक जिले के 668 गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए कुल 903 योजनाएं स्वीकृत की गई थीं। काम को तेजी से पूरा करने के नाम पर विभाग ने 121 फर्मों और एजेंसियों के साथ 410 अनुबंध किए। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक मात्र 310 योजनाएं ही पूर्ण हो सकी हैं, जबकि 593 योजनाओं का काम अब भी अधूरा पड़ा है।
गांवों में कहीं पाइपलाइन बिछाकर छोड़ दी गई है, तो कहीं पानी की टंकियां अब तक अधूरी हैं। आलम यह है कि जिन गांवों में नल के प्वाइंट लगा दिए गए हैं, वहां भी नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपक रही है। अधिकारियों की निगरानी के अभाव में करोड़ों की यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर उतरने से पहले ही हांफने लगी है और ग्रामीण पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
बी-1 सर्वे के अनुसार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल दो लाख 46 हजार 155 परिवार दर्ज हैं, जिन्हें घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) दिया जाना था। जे-5 के आंकड़ों के अनुसार अब तक एक लाख 92 हजार 810 घरों में तो टेप नल कनेक्शन लगा दिए गए हैं, लेकिन 53 हजार 345 परिवार आज भी इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं।
विभाग भले ही अपने कागजी रिकार्ड में 78.32 प्रतिशत काम पूरा होने की उपलब्धि दर्शाकर पीठ थपथपा रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति बेहद चिंताजनक । आधी से अधिक योजनाओं में पानी की सप्लाई आज तक शुरू ही नहीं हो सकी है।
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