
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। भिलाई-चरौदा नगर निगम के सहायक ग्रेड-2 अंकित यादव ने जिस अंतर-निकाय तबादले की खुद मांग की थी, बाद में उसी को नियम विरुद्ध बताते हुए हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने रिव्यू पीटिशन खारिज करते हुए कहा कि समीक्षा अदालत अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकती। समीक्षा के बहाने मामले की दोबारा सुनवाई भी नहीं की जा सकती।
अंकित की नियुक्ति नगर निगम रायपुर में सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई थी। बाद में 30 सितंबर 2021 को रिसाली और 18 सितंबर 2025 को चरौदा स्थानांतरण हुआ। चरौदा में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी होने पर अंकित ने खुद आवेदन देकर स्थानांतरण मांगा।
इसके बाद शासन ने 31 जुलाई 2026 को उसे रिक्त पद वाले नगर निगम राजनांदगांव भेज दिया। अंकित ने इसके खिलाफ 2026 में याचिका दायर की, जिसे हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया। इसके बाद पुनर्विचार याचिका लगाई गई।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 58(5) और 58(6) के तहत एक निगम से दूसरे निगम में सीधा स्थानांतरण नहीं हो सकता। कोर्ट ने मोहम्मद वसीम खान मामले से इसकी तुलना को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामलों के तथ्य अलग हैं। यहां याचिकाकर्ता स्वयं स्थानांतरण चाहता था। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा तभी संभव है, जब आदेश में ऐसी स्पष्ट गलती हो जो रिकॉर्ड पर नजर आए। असहमति या मामले की दोबारा सुनवाई की इच्छा समीक्षा का आधार नहीं हो सकती।
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