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छत्तीसगढ़ में खुद ही मांगा ट्रांसफर, फिर पहुंच गए कोर्ट! HC ने कर्मचारी को लगाई फटकार, खारिज की अर्जी

भिलाई-चरौदा नगर निगम के सहायक ग्रेड-2 अंकित यादव ने जिस अंतर-निकाय तबादले की खुद मांग की थी, बाद में उसी को नियम विरुद्ध बताते हुए हाई कोर्ट में पुनर्...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: ADITYA KUMAR
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 02:48:13 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 02:48:13 PM (IST)
छत्तीसगढ़ में खुद ही मांगा ट्रांसफर, फिर पहुंच गए कोर्ट! HC ने कर्मचारी को लगाई फटकार, खारिज की अर्जी
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

HighLights

  1. स्वयं तबादला मांगने वाले कर्मचारी की पुनर्विचार याचिका खारिज
  2. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समीक्षा अदालत अपीलीय अदालत नहीं है
  3. केवल रिकॉर्ड पर स्पष्ट गलती होने पर ही संभव है समीक्षा

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। भिलाई-चरौदा नगर निगम के सहायक ग्रेड-2 अंकित यादव ने जिस अंतर-निकाय तबादले की खुद मांग की थी, बाद में उसी को नियम विरुद्ध बताते हुए हाई कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की। न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने रिव्यू पीटिशन खारिज करते हुए कहा कि समीक्षा अदालत अपीलीय अदालत की तरह काम नहीं कर सकती। समीक्षा के बहाने मामले की दोबारा सुनवाई भी नहीं की जा सकती।

खुद मांगा था स्थानांतरण: रायपुर से चरौदा और फिर राजनांदगांव हुआ था तबादला

अंकित की नियुक्ति नगर निगम रायपुर में सहायक ग्रेड-3 के पद पर हुई थी। बाद में 30 सितंबर 2021 को रिसाली और 18 सितंबर 2025 को चरौदा स्थानांतरण हुआ। चरौदा में स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी होने पर अंकित ने खुद आवेदन देकर स्थानांतरण मांगा।


इसके बाद शासन ने 31 जुलाई 2026 को उसे रिक्त पद वाले नगर निगम राजनांदगांव भेज दिया। अंकित ने इसके खिलाफ 2026 में याचिका दायर की, जिसे हाई कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया। इसके बाद पुनर्विचार याचिका लगाई गई।

कोर्ट का फैसला: रिकॉर्ड पर स्पष्ट गलती होने पर ही संभव है समीक्षा

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 58(5) और 58(6) के तहत एक निगम से दूसरे निगम में सीधा स्थानांतरण नहीं हो सकता। कोर्ट ने मोहम्मद वसीम खान मामले से इसकी तुलना को खारिज करते हुए कहा कि दोनों मामलों के तथ्य अलग हैं। यहां याचिकाकर्ता स्वयं स्थानांतरण चाहता था। कोर्ट ने कहा कि समीक्षा तभी संभव है, जब आदेश में ऐसी स्पष्ट गलती हो जो रिकॉर्ड पर नजर आए। असहमति या मामले की दोबारा सुनवाई की इच्छा समीक्षा का आधार नहीं हो सकती।

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