हाई कोर्ट का फैसला: बस्तर के 29 कर्मचारियों को कार्यभार ग्रहण तिथि से मिलेगा नियमित वेतनमान
बिलासपुर हाईकोर्ट ने बस्तर जिले के 29 रसोइया, चौकीदार और जलवाहकों को नियमितीकरण के बाद कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से नियमित वेतनमान का लाभ देने का आदेश दिया है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 04:03:56 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 04:03:56 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- हाईकोर्ट ने बस्तर के 29 कर्मचारियों की नियमित वेतनमान याचिका मंजूर की।
- कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा नियमित वेतनमान का लाभ।
- 6 महीने के भीतर वेतन अंतर का भुगतान करने के निर्देश।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बस्तर जिले के सरकारी आश्रमों और छात्रावासों में काम कर रहे 29 रसोइया, चौकीदार और जलवाहक कर्मचारियों को हाई कोर्ट से नियमित वेतनमान का लाभ दिलाने का रास्ता साफ हो गया है। जस्टिस बिभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने समान मामले में पहले दिए गए फैसले के आधार पर कर्मचारियों की याचिका मंजूर कर ली है। यह लाभ नियमितीकरण के आदेश के बाद नियमित पद पर कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से मिलेगा। हालांकि, इसके लिए प्रत्येक कर्मचारी की कार्यभार ग्रहण करने की तारीख का सत्यापन किया जाएगा।
याचिकाकर्ता बस्तर जिले के अलग-अलग सरकारी आश्रमों और छात्रावासों में रसोइया, चौकीदार और जलवाहक के पद पर कार्यरत हैं। इन कर्मचारियों ने नियमित वेतनमान का लाभ नियमितीकरण की तारीख से देने की मांग की थी। उनका मामला यह था कि वे नियमितीकरण के बाद भी उन्हीं पदों और कामों पर लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें नियमित वेतनमान का लाभ बाद की तारीख से दिया जा रहा है। उस फैसले में अदालत ने कहा था कि कर्मचारियों को 17 जून 2022 के नियमितीकरण आदेश में दर्ज तारीख से नियमित वेतनमान मिलना चाहिए, जिस दिन उन्होंने नियमित पद पर कार्यभार ग्रहण किया था।
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अदालत ने कलेक्टर बस्तर के 13 जनवरी 2023 के आदेश को उस सीमा तक निरस्त कर दिया था, जिसमें नियमित वेतनमान का लाभ 17 जून 2022 से देने और नियमितीकरण आदेश की कुछ शर्तों को हटाने का निर्णय लिया गया था। साथ ही वेतन अंतर की गणना कर छह महीने के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया था।
जस्टिस बिभु दत्त गुरु ने पाया कि वर्तमान 29 कर्मचारियों का मामला भी पहले के फैसले के समान है। इसलिए अलग दृष्टिकोण अपनाने का कोई आधार नहीं है। अदालत ने उसी फैसले के अनुरूप याचिका मंजूर करते हुए लाभ देने का निर्देश दिया, लेकिन इसे कर्मचारियों की नियमितीकरण के बाद कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के सत्यापन के अधीन रखा है।