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पेंशन मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नगर निगम रायपुर की याचिका की खारिज, कहा- सुनवाई के समय क्यों नहीं रखे तथ्य?

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नगर निगम रायपुर की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पेंशन पात्रता संबंधी अपने ही मामले में पूर्व में पारित आदेश...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 04:43:17 PM (IST)Updated Date: Mon, 13 Jul 2026 04:43:17 PM (IST)
पेंशन मामले में हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, नगर निगम रायपुर की याचिका की खारिज, कहा- सुनवाई के समय क्यों नहीं रखे तथ्य?
रिव्यू पिटीशन का मतलब दोबारा सुनवाई नहीं।

HighLights

  1. रायपुर नगर निगम को हाई कोर्ट से बड़ा झटका
  2. रिव्यू पिटीशन का मतलब दोबारा सुनवाई नहीं
  3. कोर्ट ने रायपुर नगर निगम की दलीलें ठुकराईं

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने नगर निगम रायपुर की उस पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें पेंशन पात्रता संबंधी अपने ही मामले में पूर्व में पारित आदेश को संशोधित करने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य याचिका की सुनवाई के दौरान जो तथ्य नगर निगम की ओर से प्रस्तुत नहीं किए गए, उन्हें बाद में रिव्यू याचिका के माध्यम से उठाकर आदेश में बदलाव नहीं कराया जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि रिकार्ड में ऐसी कोई प्रत्यक्ष त्रुटि नहीं है, जो पुनर्विचार का आधार बन सके।

विधिक वारिसों के पेंशन लाभ से जुड़ा है पूरा मामला

न्यायामूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने यह आदेश नगर निगम रायपुर एवं अन्य द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। यह मामला नगर निगम के दिवंगत कर्मचारी श्याम के विधिक वारिसों से जुड़ा है। दरअसल, हाई कोर्ट ने 21 अप्रैल 2026 को कर्मचारी के वारिसों की याचिका का निपटारा करते हुए इसे पहले दिए गए एक समान निर्णय के अनुरूप माना था। अदालत ने निर्देश दिया था कि यदि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका का फैसला कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो नगर निगम बिना विलंब अतिरिक्त पेंशन का लाभ प्रदान करेगा।


नगर निगम की पुनर्विचार याचिका में दी गई दलीलें

इस आदेश के खिलाफ नगर निगम रायपुर ने पुनर्विचार याचिका दायर कर दावा किया कि संबंधित कर्मचारी अंशदायी भविष्य निधि योजना का सदस्य था, इसलिए वह पेंशन का पात्र नहीं था। निगम ने यह भी कहा कि कर्मचारी ने पेंशन के लिए आवश्यक न्यूनतम 10 वर्ष की अर्हतादायी सेवा भी पूरी नहीं की थी और ये तथ्य मुख्य सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष नहीं रखे जा सके थे। नगर निगम की ओर से अधिवक्ता पंकज अग्रवाल ने दलील दी कि पूर्व निर्णय और वर्तमान मामले के तथ्य अलग-अलग हैं, इसलिए कर्मचारी के वारिस पेंशन लाभ के पात्र नहीं हैं।

कर्मचारी के वारिसों की ओर से पेश किया गया पक्ष

वहीं, कर्मचारी के वारिसों की ओर से अधिवक्ता पूजा सिन्हा (अधिवक्ता उत्तम पांडे की ओर से) ने तर्क दिया कि मुख्य याचिका में दोनों पक्षों की उपस्थिति में द्विपक्षीय सुनवाई के बाद आदेश पारित हुआ था और रिकॉर्ड में ऐसी कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि नहीं है, जिसके आधार पर पुनर्विचार किया जा सके।

हाई कोर्ट ने त्रुटिहीन निर्णय मानकर याचिका की खारिज

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुख्य याचिका की सुनवाई के दौरान नगर निगम के अधिवक्ता स्वयं उपस्थित थे, लेकिन उस समय उन्होंने न तो कर्मचारी के सीपीएफ सदस्य होने का मुद्दा उठाया और न ही 10 वर्ष की सेवा पूरी न होने की आपत्ति दर्ज कराई।

इन तथ्यों को पहली बार पुनर्विचार याचिका में सामने लाया गया है, जबकि रिव्यू याचिका का उद्देश्य नई दलीलों पर दोबारा सुनवाई करना नहीं होता। अदालत ने स्पष्ट किया कि रिकार्ड के अवलोकन से किसी प्रकार की प्रत्यक्ष त्रुटि या वैधानिक गलती सामने नहीं आती। इसलिए पुनर्विचार याचिका विधिसम्मत नहीं है और इसे खारिज किया जाता है।

हाईकोर्ट ने इन कारणों से खारिज की रिव्यू याचिका?

  • मुख्य सुनवाई में नगर निगम के अधिवक्ता मौजूद थे।
  • उस समय सीपीएफ सदस्यता या 10 वर्ष की सेवा पूरी न होने की दलील नहीं दी गई।
  • नई दलीलों के आधार पर रिव्यू याचिका स्वीकार नहीं की जा सकती।
  • रिकॉर्ड में कोई प्रत्यक्ष कानूनी त्रुटि नहीं मिली।
  • इसलिए पुनर्विचार याचिका को चलने योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया गया।

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मुख्य आदेश में यह कहा गया था

  • 21 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने कर्मचारी के वारिसों की रिट याचिका का निपटारा किया था।
  • मामले को पहले दिए गए समान निर्णय के अनुरूप माना गया।
  • सुप्रीम कोर्ट में लंबित एसएलपी का फैसला यदि कर्मचारियों के पक्ष में आता है, तो नगर निगम को अतिरिक्त पेंशन लाभ देना होगा।
  • इसी आदेश में संशोधन के लिए नगर निगम ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसे अब हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया।