हाई कोर्ट का अहम फैसला: अब सिर्फ आधार कार्ड से तय नहीं होगी उम्र, दुर्घटना मुआवजे में बड़ी राहत
हाई कोर्ट ने कहा है कि दुर्घटना मुआवजे के लिए आधार कार्ड उम्र का एकमात्र प्रमाण नहीं है। कोर्ट ने मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर मुआवजा बढ़ाया है। साथ ही, पॉलिसी प्रभावी न होने के कारण बीमा कंपनी को राहत दी है और वाहन मालिक को हर्जाना भरने का निर्देश दिया है।
Publish Date: Sun, 19 Jul 2026 01:18:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 19 Jul 2026 01:18:50 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- आयु निर्धारण पर हाई कोर्ट की नई व्यवस्था।
- मेडिकल दस्तावेजों का होगा मूल्यांकन।
- पीड़ितों को मिलेगा बढ़ा हुआ मुआवजा।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मोटर दुर्घटना दावा मामलों में महत्वपूर्ण विधिक व्यवस्था देते हुए कहा है कि केवल आधार कार्ड में दर्ज उम्र को अंतिम और अकाट्य प्रमाण नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल को पीड़ित की आयु तय करते समय दिव्यांगता प्रमाणपत्र, उपचार संबंधी दस्तावेज, चिकित्सकीय अभिलेख और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा। न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत की एकलपीठ ने तीन अपीलों की सुनवाई में यह व्यवस्था देते हुए घायल और मृतकों के आश्रितों को दिए गए मुआवजे में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
हालांकि, अदालत ने वाहन मालिक की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें बीमा कंपनी को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार ठहराने की मांग की गई थी। कोर्ट ने माना कि दुर्घटना के समय बीमा पॉलिसी प्रभावी नहीं हुई थी, इसलिए बीमा कंपनी पर कोई दायित्व नहीं बनता। मामला 19 अप्रैल 2019 की रात आरंग थाना क्षेत्र का है। प्रभु बैंड पार्टी की टाटा सूमो ने मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। हादसे में पंचराम भुंजिया की मौके पर मौत हो गई, जबकि बिसानाथ भुंजिया ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। तीसरे घायल रंजीत भुंजिया का इलाज के दौरान एक पैर काटना पड़ा और वह 70 प्रतिशत दिव्यांग हो गया।
तीनों मामलों में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, महासमुंद ने 2 नवंबर 2021 को अलग-अलग मुआवजा तय किया था। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पाया कि घायल रंजीत भुंजिया की आयु क्लेम आवेदन में 58 वर्ष और मेडिकल दस्तावेजों में 60 वर्ष थी, लेकिन ट्रिब्यूनल ने केवल आधार कार्ड के आधार पर उसकी उम्र 68 वर्ष मान ली थी। सुप्रीम कोर्ट के सरोज बनाम इफ्को टोकियो (2024) निर्णय का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि आधार कार्ड अकेले आयु का निर्णायक प्रमाण नहीं हो सकता। उपलब्ध सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने उसकी आयु 61 से 65 वर्ष के बीच मानी और उसी अनुरूप मुआवजा बढ़ाया।
तीन सवारी होना मुआवजा घटाने का आधार नहीं
वाहन मालिक ने तर्क दिया कि मोटरसाइकिल पर तीन लोग बैठे थे, इसलिए मृतक और घायल भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार हैं। हाई कोर्ट ने यह दलील अस्वीकार करते हुए कहा कि मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन होने मात्र से योगदानात्मक लापरवाही सिद्ध नहीं होती। जब तक यह साबित न हो कि दुर्घटना का कारण या उसकी गंभीरता तीन सवारी होने से बढ़ी, तब तक मुआवजे में कटौती नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बीमा प्रीमियम जमा हो जाने मात्र से जोखिम कवरेज शुरू नहीं हो जाता। बीमा अनुबंध उसी तारीख और समय से प्रभावी माना जाएगा, जो पॉलिसी में अंकित है। चूंकि दुर्घटना पॉलिसी प्रभावी होने से पहले हुई थी, इसलिए बीमा कंपनी को दायित्वमुक्त रखने का ट्रिब्यूनल का फैसला सही माना गया।
60 दिन में जमा करनी होगी बढ़ी हुई राशि
हाई कोर्ट ने वाहन चालक गोपी साहनी और वाहन मालिक गोविंद साहनी को निर्देश दिया कि वे बढ़ी हुई मुआवजा राशि 9 फरवरी 2022 से भुगतान तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 60 दिनों के भीतर क्लेम ट्रिब्यूनल में जमा करें। ट्रिब्यूनल को सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार राशि का वितरण और आवश्यक राशि का निवेश (एफडी) सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया।