सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग को 5 प्रतिशत छूट देने पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम आदेश
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट देने के प्रावधान को लेकर एक अ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 12 Oct 2026 08:55:49 PM (IST)Updated Date: Mon, 12 Oct 2026 08:55:49 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग को 5% छूट।
- हाईकोर्ट ने भर्ती एजेंसी को नियम पालन का आदेश दिया।
- नियम उल्लंघन हुआ तो दोबारा कोर्ट आ सकेंगी याचिकाकर्ता।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट देने के प्रविधान पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु ने कहा कि भर्ती एजेंसी को हाई कोर्ट के पूर्व फैसले और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 29 जुलाई 2011 की अधिसूचना का सख्ती से पालन करना होगा। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि फिलहाल याचिकाकर्ता के साथ कोई अन्याय होने की स्थिति सामने नहीं आई है, इसलिए याचिका समय से पहले दायर की गई है।
बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील निवासी पुष्पा देवी ने 28 जुलाई 2026 को जारी सहायक शिक्षक भर्ती के विज्ञापन को चुनौती दी थी। उनकी ओर से कहा गया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट देने का प्रविधान विज्ञापन में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है।
आनलाइन आवेदन पोर्टल पर भी इस छूट का लाभ लेने की व्यवस्था नहीं होने से आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को आवेदन करने में परेशानी हो रही है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि हाई कोर्ट की पीठ ने रिट अपील और संबंधित मामलों में 10 फरवरी 2023 को दिए फैसले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को शैक्षणिक अंकों में पांच प्रतिशत छूट का पात्र माना था।
राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना में भी इसका प्रविधान है। याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि वर्ष 2019 की भर्ती में राज्य सरकार ने दो सितंबर 2025 के आदेश से ऐसी छूट लागू की थी, लेकिन 2026 की भर्ती में विज्ञापन और आवेदन पोर्टल में इसका स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
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शासन ने कहा- याचिका समय से पहले
शासन की ओर से कहा गया कि भर्ती विज्ञापन में ही स्पष्ट किया गया है कि अभ्यर्थियों की पात्रता तय करते समय न्यायालय के फैसलों और संबंधित अधिसूचनाओं का पालन किया जाएगा। इसलिए यह मान लेना उचित नहीं है कि भर्ती एजेंसी नियमों का पालन नहीं करेगी। शासन ने याचिका को समय से पहले दायर बताया।
नियमों का पालन नहीं हुआ तो दोबारा आ सकेंगी कोर्ट
हाई कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में न्यायालय के फैसलों और एनसीटीई की अधिसूचना का पालन करने की बात स्पष्ट है। ऐसे में भर्ती एजेंसी के लिए इनका पालन करना अनिवार्य है। फिलहाल किसी वास्तविक उल्लंघन के सामने नहीं आने के कारण याचिका समयपूर्व मानते हुए निराकृत कर दी गई।
कोर्ट ने पुष्पा देवी को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि भर्ती एजेंसी पूर्व फैसले और अधिसूचना के अनुरूप कार्रवाई नहीं करती और इससे उनके अधिकार प्रभावित होते हैं, तो वे दोबारा हाई कोर्ट आ सकती हैं।