बिलासपुर के 100 स्कूलों में किताबों से निकल बगिया में पहुंचे बच्चे, खेती-किसानी के गुर सीख रहे नौनिहाल
बिलासपुर जिले के 100 शासकीय स्कूलों में किचन गार्डन विकसित किए गए हैं। बच्चे खेती सीख रहे हैं और ताजी जैविक सब्जियां मध्याह्न भोजन में परोसी जा रही हैं।
Publish Date: Sun, 25 Oct 2026 04:20:52 PM (IST)Updated Date: Sun, 25 Oct 2026 04:20:52 PM (IST)
पदुमपारा स्कूल बना प्रेरक मॉडल।HighLights
- 100 स्कूलों में विकसित हुए किचन गार्डन।
- एमडीएम में ताजी जैविक सब्जियां परोसी जा रही।
- पदुमपारा स्कूल बना प्रेरक मॉडल।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जिले के शासकीय विद्यालयों में अब बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ प्रकृति, पोषण और श्रम से जोड़ने की अनूठी पहल रंग ला रही है। शाला परिसरों की खाली पड़ी अनुपयोगी भूमि पर तैयार किए गए किचन गार्डन बच्चों के लिए व्यावहारिक शिक्षा का केंद्र बन गए हैं। जिले के 100 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में हरी-भरी बगिया विकसित कर ली गई है।
शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का दोहरा लाभ सीधे नौनिहालों को मिल रहा है। बच्चे स्कूल परिसर में बीज की बुआई, पौधों की निराई-गुड़ाई, सिंचाई और जैविक खाद तैयार करने के गुर सीख रहे हैं। इस कार्य में शाला प्रबंधन समिति के साथ पालक और ग्रामीण भी श्रमदान कर रहे हैं।
बगिया में मौसम के अनुसार लौकी, बरबटी, ग्वारफली, भिंडी के अलावा स्थानीय चेंच और अमारी भाजी की पैदावार ली जा रही है। वहीं शीतकाल के लिए पालक, मेथी, धनिया और बैंगन की बुआई की गई है। सबसे बड़ा सकारात्मक बदलाव बच्चों के पोषण स्तर में देखने को मिल रहा है।
किचन गार्डन से मिलने वाली ताजी, रसायनमुक्त और हरी सब्जियों को सीधे मध्याह्न भोजन (एमडीएम) के मेनू में शामिल किया जा रहा है। इससे बच्चों को थाली में रोज पौष्टिक और विटामिनयुक्त आहार मिल रहा है। साथ ही बच्चों में श्रम के प्रति सम्मान, टीम भावना और मिट्टी से जुड़ाव पैदा हो रहा है। विभाग अब उन सभी स्कूलों में बाउंड्रीवाल व पानी की उपलब्धता का सर्वे करा रहा है, जहां अतिरिक्त भूमि उपलब्ध है।
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पदुमपारा स्कूल बना संभाग का प्रेरक माडल
संकुल सलका नवागांव का शासकीय प्राथमिक विद्यालय पदुमपारा किचन गार्डन के मामले में नजीर बन गया है। यहां वर्ष 2023 से संचालित बगिया में अध्ययनरत 17 बालक और 15 बालिकाएं दो शिक्षकों के मार्गदर्शन में नियमित बागवानी करते हैं। बच्चों ने स्कूल परिसर को पूरी तरह हरा-भरा बना दिया है। यहां पैदा होने वाली सब्जियों का नियमित उपयोग मध्याह्न भोजन में किया जाता है।
पालकों के सहयोग से संवर रही शाला की भूमि
किचन गार्डन को सफल बनाने में ग्रामीणों और पालकों की सामुदायिक सहभागिता की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्रामीण स्वयं फावड़ा उठाकर स्कूलों की पथरीली जमीन को खेती योग्य बनाने में जुटे हैं। घरेलू कंपोस्ट खाद और बीज उपलब्ध कराने में भी समुदाय आगे आ रहा है। इससे शाला परिसर मवेशियों और असामाजिक तत्वों के अतिक्रमण से सुरक्षित होकर सुंदर प्राकृतिक उद्यान में बदल रहे हैं।
वर्जन
जिन स्कूलों में बाउंड्री वाल है वहां पर किचन गार्डन सफलतापूर्वक तैयार किए गए हैं। इससे बच्चों को खेती की व्यावहारिक समझ मिल रही है और मध्याह्न भोजन में ताजी हरी सब्जियां मिल पा रही हैं। जिन स्कूलों में जमीन व पानी की व्यवस्था है, वहां भी इसे अनिवार्य रूप से लागू कराया जा रहा है।
संदीप पांडे, जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर