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बिलासपुर में श्मशान घाटों पर दबंगों का अवैध कब्जा, अंतिम संस्कार के लिए अब कलेक्ट्रेट पहुंच रहे ग्रामीण

बिलासपुर जिले के कई ब्लॉक में श्मशान घाटों पर अवैध कब्जे के कारण ग्रामीणों को अंतिम संस्कार में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तहसील स्तर पर ...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 10 Jul 2026 11:14:27 AM (IST)Updated Date: Fri, 10 Jul 2026 11:14:27 AM (IST)
बिलासपुर में श्मशान घाटों पर दबंगों का अवैध कब्जा, अंतिम संस्कार के लिए अब कलेक्ट्रेट पहुंच रहे ग्रामीण
स्थानीय प्रशासन की उदास ग्रामीण, अब न्याय के लिए पहुंच रहे कलेक्ट्रेट

HighLights

  1. श्मशान घाटों की जमीन पर अवैध कब्जे से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश।
  2. पटवारी और आरआई की अनदेखी के चलते रसूखदारों के हौसले बुलंद।
  3. कलेक्टर संजय अग्रवाल ने अतिक्रमण हटाकर सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। ग्रामीण अंचलों में दबंगों द्वारा अंतिम संस्कार की भूमि व जाने के मार्ग पर ही कब्जा किया जा रहा है। शासकीय श्मशान घाटों और मुक्तिधामों में हो रहे अवैध कब्जो से लोगो को अपनों का कफन दफन करना भी मुश्किल हो रहा है। स्थानिय प्रशासन से गुहार लगा-लगा कर थक चुके ग्रामीण अब कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाने पहुंच रहे है। मामले में प्रशासन का कहना है कि हम लागतार कार्रवाई कर रहे है।

बेलगहना ब्लाक के सोनपुरी पंचायत अंतर्गत ग्राम ढोलमौहा सहित दर्जनों गांवों में हालात बदतर हो चुके हैं। शव को लेकर मुक्तीधाम ले जाने वाले सार्वजनिक मार्गों को भी बेजा कब्जा धारियों ने नहीं छोड़ा, कुछ तो शमशान भूमि का रास्ता घेरकर खेती या निर्माण कार्य करवा रहे है।


ग्राम पंचायत और तहसील कार्यालयों के चक्कर काटकर थक चुके मायूस ग्रामीण अब अपने परिजनों के अंतिम संस्कार व कफन-दफन की चिंता को लेकर लगातार कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आस्था के इन केंद्रों पर कब्जा होने से गांव में तनाव और भय का माहौल है। सोनपुरी और ढैंचा-नगोई क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने बताया कि कई गांवों में श्मशान घाट की जमीनों को ट्रैक्टर से जोतकर खेतों में मिला लिया गया है।

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तहसीलदार नहीं दे रहे ध्यान जाए कहा

बेलगहना तहसील के ढोलमौहा गांव के पीड़ितों ने बताया कि उन्होंने 13 जून 2026 को तहसीलदार से शिकायत की थी। ग्राम पंचायत द्वारा नोटिस जारी होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कब्जाधारियों के हौसले बुलंद हैं। जब गांव की महिलाओं और स्व-सहायता समूह के सदस्यों ने अवैध कार्य का विरोध किया, तो रसूखदार तत्वों द्वारा उनके साथ गाली-गलौज, अभद्र व्यवहार और धमकी दी गई।

चारो ब्लाक में बेजा कब्जा की यही स्थिति

बेलगहना का ग्राम ढोलमौहा ही नहीं नगोई में सूर्यवंशी समाज का शमशाम घाट भी बेजा कब्जाधारियों की भेंट चढ़ चुका है। ऐसी ही स्थिति तखतपुर व बिल्हा ब्लाक के कई गांवों की भी है, जहां लोग श्मशान भूमि को भी नहीं छोड़ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी और राजस्व निरीक्षक मौके पर सीमांकन करने नहीं पहुंचते और शिकायतें महीनों लंबित रहती हैं। मुक्तिधाम जैसी संवेदनशील जगहों पर प्रशासन की सुस्ती के कारण ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

कैसे बताई ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और दर्द

  • कुंद बाई ने बताया कि श्मशान घाट हमारे पूर्वजों की अंतिम निशानी और पूरे गांव की आस्था का स्थान है। दबंगों ने वहां जाने वाले रास्ते को ही काट दिया है। अब अगर गांव में किसी की मौत हो जाए, तो हम उसका कफन-दफन कहां करेंगे, यह समझ से परे है।
  • धनकुंवर मानिकपुरी का कहना है कि अवैध कब्जे का विरोध करने पर हमें डराया-धमकाया जाता है। तहसील कार्यालय में हमारी शिकायतें धूल खा रही हैं। जब रसूखदार महिलाओं को गाली-गलौज करते हैं, तब भी पुलिस-प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठाता हैं।
  • मदन कुंवर यादव ने बताया सरकारी अमला सिर्फ कागजी नोटिस जारी कर शांत बैठ जाता है। आरआई और पटवारी सीमांकन करने के लिए तारीख तय करते हैं, लेकिन मौके पर कभी नहीं आते। हमारी सुनवाई केवल कलेक्ट्रेट में ही संभव दिख रही है।

  • कृत बाई ने कहा मुक्तीधाम सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं, हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर है। मुक्तिधाम की जमीन को जोतकर खेत बना दिया गया है। जब तक प्रशासन कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं करेगा, तब तक ये रसूखदार कब्जा नहीं छोड़ेगें।
  • वर्जन --

    श्मशान घाट और मुक्तिधाम की जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें बेहद गंभीर हैं। सभी अनुविभागीय अधिकारियों और तहसीलदारों को निर्देशित किया जा रहा है कि वे तत्काल राजस्व टीम भेजकर श्मशान भूमियों का सीमांकन सुनिश्चित करें। जहां भी अतिक्रमण पाया जाएगा, उसे कड़ाई से हटाया जाएगा। शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    संजय अग्रवाल, कलेक्टर, बिलासपुर