
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। भविष्य में बिना माउस व की-बोर्ड के कम्प्यूटर चलेंगे। किसी तरह का शार्टकट का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। एर्गोनामिक की-बोर्ड और माउस की भी आवश्यकता नहीं होगी। वाइस के जरिए सीधे कमांड होगा। हाथ, उंगलियों, कोहनी, कमर दर्द और स्पान्डिलिटिस जैसी भीषण दर्द एवं समस्याओं से भी सामना नहीं करना पड़ेगा। यह बातें मुख्य वक्ता अटल विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, आइटी एक्सपर्ट और यंग साइंटिस्ट अवार्ड से सम्मानित डा.तरुणधर दीवान ने साइबर सुरक्षा पर आयोजित कार्यशाला में छात्राओं को संबोधित करते हुए कही।
शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भौतिकी विभाग द्वारा साइबर सुरक्षा और इंटरनेट आफ थिंग्स विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता के रूप में पहुंचे डा. तरूणधर दीवान ने छात्राओं को कई महत्वपूर्ण जानकारी से अवगत कराया। डा.दीवान ने आगे कहा कि अगले कुछ वर्षों में की बोर्ड और माउस की उपयोगिता खत्म हो जाएगी। एक दो वर्षों में पूरी मार्केटिंग प्रक्रिया डिजिटल हो जाएगी नोट भी बंद हो सकते हैं। आज भारत में 35 प्रतिशत लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं कुछ वर्षों में यह 50 प्रतिशत से अधिक हो जाएगा। इसलिए इंटरनेट सुरक्षा को जानना और समझना बेहद आवश्यक हो गया है। भविष्य में कोई भी जाब बिना इन्फार्मेशन टेक्नोलाजी के संभव नहीं होगा। कार्यशाला की अध्यक्षता प्राचार्य डा.एसआर कमलेश ने किया। कार्यक्रम में भौतिकी विभाग एमएससी पूर्व व अंतिम की समस्त छात्राएं, विभागाध्यक्ष, डा.एपी. गोस्वामी, डा.बनर्जी डा. सोनी रहे। कार्यक्रम का संचालन डा.कमलेश ठक्कर द्वारा किया गया।
पासवर्ड रखें एकदम खास
डा.तरुण ने छात्राओं से यह भी कहा कि आनलाइन ठगी, पासवर्ड सुरक्षा, एटीएम फ्राड एवं इंटरनेट हैक जैसी कई घटनाएं समाज में घटित हो रही हैं। इससे बचना एकदम आसान है। कभी भी अपना जन्मतिथि या कोई सीधा या सरल नंबर ना रखें। पासवर्ड बनाने में होशियारी रखें और हमेशा मजबूत और यूनिक पासवर्ड बनाएं। आसान पासवर्ड से आपका खाता लुट सकता है। पासवर्ड में हमेशा अपर और लोअर कैरेक्टर का इस्तेमाल करें। इसमें नंबर भी दर्ज करें।
इंटरनेट आधारित जीवनशैली
प्राचार्य डा.एसआर कमलेश ने कहा कि वर्तमान में आम जनजीवन इंटरनेट आधारित हो चुका है। ऐसे में सावधानी सबसे आवश्यक कड़ी है। डा. तरुण ने साइबर सुरक्षा एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर 100 से अधिक रिसर्च पेपर पब्लिश हैं। 20 से अधिक प्रोजेक्ट पेटेंट हो चुका हैं। भारत सरकार के नीति आयोग के माध्यम से पीएम और राष्ट्रपति द्वारा प्रोजेक्टर को पृरस्कृत भी किया गया है। छात्राओं को दिए गए सुझाव समाज को जागरूक करने वाला है।