छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में कहा था- मौतें रोकने बनाए गए हैं एसओपी, इधर कोटवार की चली गई जान
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने सर्पदंश से होने वाली मौतों को रोकने के लिए संजीवनी एक्सप्रेस 108 एम्बुलेंस में एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराने का फैसला किया...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 06 Oct 2026 11:28:06 PM (IST)Updated Date: Tue, 06 Oct 2026 11:28:06 PM (IST)
HighLights
- बिल्हा के सेवती गांव में विद्वयुत प्रवाहित तार की चपेट में आने से हुई मौत
- कोर्ट में सुनवाई के दौरान विद्वयुत वितरण कंपनी ने पेश की थी रिपोर्ट 0
- सिर्फ कागजों तक सीमित है मानव-पशु मौतों की रोकथाम
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बिजली कंपनी की लापरवाही के कारण बिल्हा थाना क्षेत्र के सेवती गांव में बड़ी घटना हो गई। खेत में टूटे करंट प्रवाहित तार के संपर्क में आने से गांव के कोटवार की मौत हो गई। करीब 10 दिन पहले तार टूटने की शिकायत ग्रामीणों ने बिजली कंपनी से की थी। इसके बावजूद बिजली विभाग का अमला समय पर सुधार करने नहीं पहुंचा।
रविवार को जब सुधार दल मौके पर पहुंचा, तो खेत में गांव के कोटवार का शव पड़ा मिला। घटना के बाद ग्रामीणों में बिजली विभाग के प्रति आक्रोश है। मालूम हो कि मानव-पशु मौतों की रोकथाम के लिए हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। कंपनी के अधिकाररियों ने एसओपी पेश कर मौतें रोकने की जानकारी दी थी।
बिल्हा क्षेत्र के सेवती निवासी कमलदास मानिकपुरी कोटवार होने के साथ किसान थे। पिछले दिनों वह फसल देखने के लिए खेत की ओर गए थे। इसी दौरान वह टूटकर गिरे विद्युत तार की चपेट में आ गए। इससे घटना स्थल पर उसकी मौत हो गई। हालांकि इस घटना की जानकारी परिवार या गांव के किसी भी ग्रामीण को नहीं थी। जब कोटवार घर नहीं लौटा, तब 30 सितंबर को स्वजन ने थाने में गुम इंसान की रिपोर्ट दर्ज कराई।
इसी बीच रविवार को बिजली विभाग का सुधार दल गांव पहुंचा। दरअसल यहां 11 केवी तार टूटा हुआ था। जिसकी शिकायत उन्होंने 10 दिन पहले जिम्मेदार अधिकारी से की थी। उन्हें उम्मीद थी कि वह तत्काल सुधार दल को भेजकर टूटे तार को जुड़वा देंगे, लेकिन किसी ने इस शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया। रविवार को सुधार दल जब पहुंचा, तब उनके साथ कुछ ग्रामीण भी थे। उसी समय खेत पर कोटवार का शव नजर आया।
ग्रामीणों ने शव की पहचान की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की सूचना मिलते ही बिल्हा पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही गांव के लोगों से हादसे के संबंध में पूछताछ की। ग्रामीणों ने पुलिस को तार टूटने और बिजली कंपनी की लापरवाही दोनों की जानकारी दी। उनका आरोप है कि इससे पहले भी कई बार बिजली के तार टूटकर गिर चुके थे। इसके बावजूद सुरक्षा को लेकर उचित ध्यान नहीं दिया गया।
तबादले के बाद भी जमे कनिष्ठ यंत्री
बरतोरी वितरण केंद्र में पदस्थ कनिष्ठ यंत्री रोशन श्रीवास को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि 31 अगस्त को उनका तबादला सरगांव वितरण केंद्र कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद वे बरतोरी में ही जमे हुए हैं। सेवती गांव उन्हीं के क्षेत्र अंतर्गत आता है। आरोप है कि वे ग्रामीणों की बिजली संबंधी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते और फील्ड में भी उनकी मौजूदगी कम ही रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि सेवती में टूटे बिजली तार की शिकायत समय पर गंभीरता से ली जाती और तत्काल मैदानी अमले को मौके पर भेजकर सुधार कराया जाता तो शायद इतनी बड़ी घटना टल सकती थी। ग्रामीणों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
हाई कोर्ट सख्त, नियमित जांच का है आदेश
बिजली करंट से होने वाली दुर्घटनाओं और मानव-पशु मौतों की रोकथाम के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) द्वारा तैयार स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) के प्रभावी क्रियान्वयन पर पिछले माह हुई सुनवाई में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जोर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की युगलपीठ ने कहा कि केवल एसओपी बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रविधानों का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने विशेष रूप से ग्रामीण, कृषि और वन क्षेत्रों में बिजली लाइनों, पोल, ट्रांसफार्मरों तथा विद्युत बाड़ की नियमित जांच और असुरक्षित स्थिति मिलने पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मजदूर ने गंवाए दोनों हाथ, विद्युत कंपनी ने कोर्ट नहीं जाने का बनाया दबाव
कोटा थाना क्षेत्र के ग्राम भरारी में 33केवी हाईटेंशन तार की चपेट में आने से 23 वर्षीय युवक महावीर उजागर गंभीर रूप से झुलस गया। डाक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए दोनों हाथ काटने पड़े। हादसे के पांच माह बाद भी शासन से कोई राहत नहीं मिलने पर पीड़ित के भाई ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित जनदर्शन में गुहार लगाई। वहीं विद्युत कंपनी के अफसरों द्वारा कोर्ट नहीं जाने का दबाव बनाने की बात भी उन्होंने कही है। महावीर बीते 29 मार्च को दीवान फार्म हाउस में भवन निर्माण मजदूरी के लिए गया हुआ था।
यह घटना कैसे हुई समझ से परे है। आमतौर पर तार टूटने के बाद उसमें करंट नहीं रहता। इस मामले की गंभीरता से विभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी। कनिष्ठ यंत्री के तबादले से संबंधित जानकारी नहीं है। इस संबंध में कार्यपालन यंत्री से बात की जाएगी। सुरेश जांगड़े, अधीक्षक यंत्री, ग्रामीण बिजली वितरण कंपनी बिलासपुर