नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में बढ़ते हाथी-मानव संघर्ष और वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर स्वत: संज्ञान से चल रही जनहित याचिका में हाई कोर्ट ने हस्तक्षेपकर्ता की ओर से दिए गए सुझावों पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। छह अक्टूबर को हुई सुनवाई में राज्य की ओर से कहा गया कि सुझावों पर जवाब देना जरूरी है और इसके लिए कुछ समय दिया जाए। कोर्ट ने राज्य को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की पीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि 11 अगस्त के आदेश के पालन में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव का हलफनामा पहले ही रिकार्ड पर आ चुका है। कोर्ट के निर्देश पर पक्षकारों से यह बताने को कहा गया था कि विभाग की ओर से उठाए गए कदमों के अलावा और कौन से उपाय किए जाने चाहिए। इसी क्रम में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से लिखित सुझाव पेश किए गए, जिसकी प्रति राज्य के अधिवक्ता को भी दी गई।
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रसून कुमार भादुड़ी ने कहा कि हस्तक्षेपकर्ता के सुझावों पर जवाब दाखिल करना आवश्यक है। इस पर कोर्ट ने तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 25 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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हाथियों के गांवों में पहुंचने पर कोर्ट ने मांगा था विस्तृत जवाब
इससे पहले 11 अगस्त को कोर्ट ने समाचार पत्रों और सामाजिक माध्यमों में सामने आ रही घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा था कि हाथी लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में घूमकर गांवों में पहुंच रहे हैं। इससे ग्रामीणों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है और कुछ घटनाओं में लोगों की जान भी गई है। कोर्ट ने वन विभाग के सचिव से मानव-हाथी संघर्ष रोकने और प्रभावित क्षेत्रों में मानव जीवन की सुरक्षा के लिए उठाए गए ठोस कदमों का ब्योरा मांगा था।
हलफनामे में 22 मौत और 4.76 करोड़ की राहत का ब्योरा
31 अगस्त को दाखिल हलफनामे में वन विभाग ने बताया था कि एक अप्रैल से 24 अगस्त 2026 तक हाथियों के कारण मानव मृत्यु के 22 मामले सामने आए। इस अवधि में फसल, मकान, पशु और अन्य संपत्ति के नुकसान समेत 4,026 मामलों में कुल चार करोड़ 76 लाख 88 हजार 625 रुपये की राहत बांटी गई।
विभाग ने हाथियों की निगरानी, गांवों को पहले से सूचना, रात में गश्त, हाथी मित्र दल, त्वरित कार्रवाई दल और पुलिस-राजस्व विभाग के साथ समन्वय जैसे उपायों की जानकारी दी थी।
बिजली लाइनों से वन्यजीवों की मौत रोकने के लिए भी बिजली वितरण कंपनी ने कार्रवाई का ब्योरा दिया था। वन विभाग द्वारा चिन्हित 2,490 संवेदनशील स्थानों में से 2,287 का संयुक्त निरीक्षण और 1,882 स्थानों पर खामियों का सुधार किया जा चुका था। शेष स्थानों पर काम चल रहा था। इसी पूरी कार्रवाई की आगे निगरानी के लिए अब हस्तक्षेपकर्ता के सुझावों पर राज्य का जवाब महत्वपूर्ण होगा।