नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः चांटीडीह क्षेत्र में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बेशकीमती जमीन हड़पने और उसे टुकड़ों में बेचने का बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। मूल भूस्वामी और उसके कथित पुत्र के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए फर्जी वारिस खड़ा कर खसरा नंबर 489 की जमीन अपने नाम करा ली गई थी।
मामले में फर्जीवाड़ा का पर्दाफाश होने पर एसडीएम ने फैसला सुनाते हुए वर्ष 2012 और 2024 के सभी नामांतरण आदेश निरस्त कर दिया, साथ ही सभी 12 बटांकनों को विलोपित कर रिकार्ड मूल स्थिति में लाने और कोई वैध वारिस न होने पर पूरी भूमि शासन के पक्ष में दर्ज करने का आदेश जारी किया है।
विवाद मौजा चांटीडीह स्थित खसरा नंबर 489 के रकबा 0.121 हेक्टेयर (लगभग 13 हजार वर्गफीट) भूमि का है। वर्ष 2012 में राजस्व रिकार्ड में मूल भूस्वामी महाजन केंवट और उसके पुत्र रामप्रसाद केंवट की फौती दर्ज कराकर राजकुमार केंवट ने खुद को वारिस बताकर अपना नाम दर्ज करा लिया था। इसके बाद जमीन को मुख्त्यार आम के माध्यम से कई टुकड़ों में बेचा जाने लगा।
हाल ही में तहसीलदार न्यायालय से बिना आपत्तिकर्ता को सुने आनन-फानन में कोरबा के एक क्रेता के पक्ष में नामांतरण आदेश भी जारी कर दिया गया था। तहसीलदार के आदेश के खिलाफ पीड़ित रामाश्रय कश्यप ने एसडीएम कोर्ट में प्रथम अपील दायर की।
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एसडीएम द्वारा जब दस्तावेजों की गहन पड़ताल कराई गई, तो नगर निगम के जन्म-मृत्यु रजिस्टर से चौंकाने वाली बात सामने आई। निगम रिकार्ड में जिस मृत्यु प्रमाण पत्र पर महाजन केंवट का नाम दर्ज था, वास्तव में वहां मृतक का नाम लावारिस दर्ज पाया गया। वहीं रामप्रसाद के मृत्यु प्रमाण पत्र के पंजीकरण रजिस्टर में राजू कैवर्त का नाम मिला।
पटवारी और स्थानीय पार्षद के पंचनामे में यह भी प्रमाणित हुआ कि मूल भूस्वामी महाजन केंवट का चांटीडीह में कभी निवास ही नहीं रहा और न ही उसका कोई वारिस मौजूद है। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि जब वर्ष 2012 का मूल फौती नामांतरण ही फर्जी तथ्यों पर आधारित था, तो उसके बाद के सभी विक्रय और नामांतरण स्वतः ही विधि विरुद्ध व शून्य हो जाते हैं।
नगर निगम के रिकार्ड में निकला लावारिस
फर्जीवाड़े की पुष्टि तब हुई जब जमीन के नामांतरण में लगाए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों का नगर निगम से मिलान कराया गया। निगम ने रिपोर्ट दी कि वर्ष 1990 के जिस पंजीकरण क्रमांक पर महाजन केंवट का नाम बताया गया, रजिस्टर में वहां मृतक का नाम लावारिस दर्ज है। दूसरे प्रमाण पत्र में भी नाम पूरी तरह भिन्न पाया गया, जिससे स्पष्ट हुआ कि कूट रचित दस्तावेज तैयार कर जमीन हड़पी गई थी।
12 टुकड़ों में बिकी जमीन का क्रय-विक्रय प्रतिबंधित
एसडीएम ने आदेश दिया है कि खसरा नंबर 489 के सभी 12 बटांकनों को तुरंत निरस्त कर अधिकार अभिलेख दुरुस्त किया जाए। कैफियत कॉलम में दर्ज करने को कहा गया है कि बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के इस भूमि पर किसी भी प्रकार का लेन-देन और संव्यवहार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। वारिस न मिलने पर जमीन को सीधे शासन के पक्ष में राजसात किया जाएगा।