मध्य प्रदेश की विवादित जमीन की छत्तीसगढ़ में होगी सुनवाई, हाई कोर्ट बोला- जमीन जिस कोर्ट की सीमा में है, वहां दायर हो सकता है केस
मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के दरैन गांव की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 01 Oct 2026 02:05:56 PM (IST)Updated Date: Thu, 01 Oct 2026 02:10:02 PM (IST)
HighLights
- जमीन पर हक घोषित करने, बंटवारा और स्थायी रोक लगाने की मांग
- शहडोल जिले के दरैन गांव की जमीन को लेकर चल रहे विवाद
- मुकदमा उस कोर्ट में चल सकता है, जिसकी सीमा में संपत्तियों में से कोई एक हो
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के दरैन गांव की जमीन को लेकर चल रहे विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है। हाई कोर्ट ने जनकपुर की सिविल अदालत के आदेश को सही मानते हुए शहडोल निवासी बृजेंद्रनाथ कुशवाहा सहित छह याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी।
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि यदि एक ही संपत्ति विवाद से जुड़ी जमीन अलग-अलग अदालतों के क्षेत्र में स्थित है, तो जहां विवादित संपत्तियों में से कोई एक हिस्सा स्थित है, वहां भी पूरा मुकदमा चलाया जा सकता है।
जमीन पर हक घोषित करने, बंटवारा और स्थायी रोक लगाने की मांग
जनकपुर सिविल कोर्ट में बिरेंद्र कुमार ने दरैन, खरिका टोला और घटई गांवों की जमीन पर हक घोषित करने, बंटवारा और स्थायी रोक लगाने की मांग करते हुए सिविल वाद दायर किया है। दरैन की जमीन शहडोल, मध्य प्रदेश में है, जबकि घटई और खरिका टोला की जमीन मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में आती है।
जनकपुर की अदालत ने 10 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया था
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि दरैन की जमीन उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति है और छत्तीसगढ़ की अदालत को उस पर सुनवाई का अधिकार नहीं है। उन्होंने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 16 के तहत आवेदन दिया था, जिसे जनकपुर की अदालत ने 10 अगस्त 2026 को खारिज कर दिया।
मुकदमा उस कोर्ट में चल सकता है, जिसकी सीमा में संपत्तियों में से कोई एक हो
हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 17 के अनुसार अलग-अलग न्यायालयों की सीमा में स्थित कई अचल संपत्तियों से जुड़े एक ही विवाद का मुकदमा उस अदालत में चल सकता है, जिसकी सीमा में उन संपत्तियों में से कोई एक स्थित हो। सुप्रीम कोर्ट के शिवनारायण बनाम मणिकलाल फैसले में भी यही सिद्धांत स्पष्ट किया गया है।
चूंकि घटई और खरिका टोला की जमीन जनकपुर अदालत की सीमा में है, इसलिए वहां मुकदमा चलाना अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है। अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
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