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महादेव ऐप केस: विशाखापत्तनम की कंपनी का बैंक खाता तुरंत अनफ्रीज करने का हाई कोर्ट का आदेश

महादेव ऐप केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फॉरेंसिक सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए एक शिपिंग कंपनी का आईसीआईसीआई बैंक खाता तत्काल चालू करने का आदेश दिया है।

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 03 Nov 2026 09:46:06 PM (IST)Updated Date: Tue, 03 Nov 2026 09:46:06 PM (IST)
महादेव ऐप केस: विशाखापत्तनम की कंपनी का बैंक खाता तुरंत अनफ्रीज करने का हाई कोर्ट का आदेश
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HighLights

  1. महादेव ऐप मामले में हाईकोर्ट ने बैंक खाता अनफ्रीज करने के दिए आदेश।
  2. फॉरेंसिक रिपोर्ट में सट्टा खेलने या खिलवाने का सबूत नहीं मिला।
  3. खमतराई पुलिस और निचली अदालत के आदेशों को हाईकोर्ट ने किया निरस्त।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। महादेव एप ऑनलाइन सट्टा मामले में विशाखापत्तनम की शिपिंग कंपनी के चालू बैंक खाते को लंबे समय तक फ्रीज रखने की कार्रवाई को हाई कोर्ट ने अनुचित ठहराया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने पुलिस और विचारण न्यायालयों के आदेश निरस्त करते हुए खमतराई पुलिस को आईसीआईसीआई बैंक में संचालित खाते को तत्काल चालू कराने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी को यदि खाते में किसी खास रकम के अपराध से जुड़े होने के ठोस साक्ष्य मिलते हैं तो वह कानून के अनुसार उस रकम को सुरक्षित रखने के लिए सक्षम मजिस्ट्रेट से आदेश मांग सकती है।


विशाखापत्तनम निवासी शाहिब खान और उनकी पत्नी सहर खान ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। दोनों एम/एस इंडिगो शिपिंग सर्विसेज के प्रबंध भागीदार हैं। कंपनी का आईसीआईसीआई बैंक में चालू खाता है। खमतराई पुलिस ने दर्ज केस की जांच के दौरान खाते को डेबिट फ्रीज करा दिया था। इस मामले में धोखाधड़ी और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत अपराध दर्ज है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे न तो एफआईआर में आरोपित हैं और न ही आरोपपत्र में उनके नाम शामिल हैं। केवल मोहम्मद फरहान के साथ कारोबारी लेन-देन के आधार पर उनका खाता फ्रीज किया गया है।

साइबर जांच में नहीं मिला सट्टा खेलने या खिलवाने का सबूत

राज्य की ओर से बताया गया कि मोहम्मद फरहान के मोबाइल फोन की जांच में याचिकाकर्ताओं के खाते से जुड़े संदिग्ध लेन-देन सामने आए थे। इसी आधार पर खाते को फ्रीज किया गया। हालांकि, हाई कोर्ट के निर्देश पर पेश साइबर फोरेंसिक रिपोर्ट में महादेव और रेड्डी एप के जरिए ऑनलाइन सट्टा खेलने या खिलवाने से संबंधित कोई साक्ष्य नहीं मिला। रिपोर्ट में केवल एक मोबाइल से विभिन्न खातों में पैसे के लेन-देन संबंधी व्हाट्सएप चैट मिलने का उल्लेख था। उसमें न तो रकम का ब्योरा था और न ही यह बताया गया था कि संबंधित राशि अपराध की कमाई है।

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पूरे खाते पर रोक उचित नहीं

कोर्ट ने कहा कि बैंक खाते को फ्रीज करने की पुलिस को शक्ति है, लेकिन इसके लिए खाते और अपराध के बीच सीधा संबंध बताने वाला आधार होना चाहिए। केवल संदिग्ध लेन-देन का सामान्य आरोप लगाकर पूरे कारोबारी खाते को अनिश्चितकाल तक बंद नहीं रखा जा सकता। जांच एजेंसी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि कितनी रकम संदिग्ध है और खाते में जमा पूरी राशि को रोकना क्यों जरूरी है। कोर्ट ने 3 सितंबर 2024 के न्यायिक मजिस्ट्रेट और 26 अक्टूबर 2024 के दसवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के आदेश निरस्त कर दिए।

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