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फेसबुक पर आए SBI योनो के फर्जी लिंक से बड़ा साइबर अटैक, बिलासपुर में अधिवक्ता के तीन खातों से 6 लाख पार

बिलासपुर के टिकरापारा निवासी 66 वर्षीय अधिवक्ता तापस हजारा साइबर ठगी का शिकार हो गए हैं। ठगों ने फेसबुक पर एसबीआइ योनो एप का फर्जी लिंक भेजकर उनके तीन...और पढ़ें

By Mohammad Safraj MemonEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 13 Sep 2026 03:35:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 13 Sep 2026 03:35:04 PM (IST)
फेसबुक पर आए SBI योनो के फर्जी लिंक से बड़ा साइबर अटैक, बिलासपुर में अधिवक्ता के तीन खातों से 6 लाख पार

HighLights

  1. फेसबुक पर मिले SBI Yono लिंक से 6 लाख की ठगी।
  2. टिकरापारा के 66 वर्षीय सीनियर अधिवक्ता तापस हजारा बने शिकार।
  3. 3 दिनों में तीन खातों से कटी रकम, कोतवाली में FIR

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: कोतवाली क्षेत्र में साइबर ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने फेसबुक के जरिए एसबीआइ के योनो एप का फर्जी लिंक भेजकर अधिवक्ता को छह लाख रुपये की चपत लगा दी। पीड़ित ने इसकी जानकारी होते ही साइबर पोर्टल में इसकी शिकायत की। इसके बाद उन्होंने कोतवाली थाने में मामले की शिकायत की है। इस पर पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया है।

फर्जी लिंक का जाल

कोतवाली क्षेत्र के टिकरापारा मन्नू चौक में रहने वाले तापस हजारा(66) अधिवक्ता हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि पांच सितंबर को वह मोबाइल पर फेसबुक चला रहे थे। इसी दौरान एसबीआइ योनो एप डाउनलोड करने का लिंक आया। उन्होंने लिंक को टच कर एप डाउनलोड करने का प्रयास किया। एप डाउनलोड नहीं हुआ, लेकिन इसके बाद उनके बैंक खातों से रकम निकलने लगी।


मोबाइल हैक व ट्रांजेक्शन, साइबर पोर्टल व थाने में शिकायत

उन्हें कुछ गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो उन्होंने मोबाइल से योनो एप को अनइंस्टाल कर दिया। अगले दिन सुबह करीब नौ बजे उन्हें अपने खातों से रुपये निकाले जाने की जानकारी मिली। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक अलग-अलग तिथियों में उनके तीन बैंक खातों से करीब छह लाख रुपये आनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए दूसरे खातों में भेज दिए गए। ठगी का पता चलने पर अधिवक्ता ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित ने पुलिस को बैंक खातों स्टेमेंट पुलिस को सौंप दिया है। अब पुलिस ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट के जरीए ठगों का सुराग लगा रही है।

ठग गिरोह ऐसे बना रहे हैं निशाना

साइबर ठग अक्सर बैंकिंग एप के नाम और लोगो लगाकर फर्जी लिंक प्रसारित करते हैं। लिंक पर क्लिक करने के बाद उपयोगकर्ता को वास्तविक बैंक एप जैसा दिखने वाला एप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई बार ऐसे एप मोबाइल में अनाधिकृत गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

इंटरनेट मीडिया पर मिले किसी भी बैंकिंग एप के लिंक को सीधे डाउनलोड करने के बजाय संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत एप स्टोर से ही एप इंस्टाल करना सुरक्षित है। बैंकिंग से जुड़े किसी भी संदेश की विश्वसनीयता जांचे बिना उस पर कार्रवाई करना जोखिम भरा हो सकता है।

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