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बिलासपुर में एसबीआई तोरवा ब्रांच में बड़ी चूक, बिना आवेदन बदला खाताधारक का मोबाइल नंबर सुरक्षा पर सवाल

बिलासपुर के एसबीआई तोरवा ब्रांच में खाताधारक नेहा आहूजा का मोबाइल नंबर बिना आवेदन बदला गया, फोन-पे बंद होने पर खुलासा, बैंक ने जांच शुरू की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल।

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 10:24:54 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 10:24:54 PM (IST)
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बिलासपुर में एसबीआई तोरवा ब्रांच में बड़ी चूक, बिना आवेदन बदला खाताधारक का मोबाइल नंबर सुरक्षा पर सवाल
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. SBI तोरवा में बिना सहमति मोबाइल नंबर बदला।
  2. फोन-पे बंद होने से खाताधारक को लगा पता।
  3. बैंकिंग सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बैंक खाते में जमा रकम की सुरक्षा को लेकर हर खाताधारक सतर्क रहता है, लेकिन खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर ही बिना जानकारी बदल दिया जाए तो चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। भारतीय स्टेट बैंक की तोरवा शाखा में सामने आए ऐसे ही एक मामले ने बैंकिंग व्यवस्था की सुरक्षा, गोपनीयता और सत्यापन प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

तोरवा निवासी नेहा आहूजा पति सुनील कुमार आहूजा ने पांच नवंबर को एसबीआइ के शाखा प्रबंधक को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की है। शिकायत के मुताबिक उनका भारतीय स्टेट बैंक की तोरवा शाखा में व्यक्तिगत चालू खाता संचालित है। इसमें वर्षों से उनका मोबाइल नंबर पंजीकृत था। इसी नंबर के माध्यम से वे फोन-पे पर नियमित लेनदेन भी करती थीं।


नेहा का आरोप है कि 27 अक्टूबर 2026 की रात करीब 10 बजे अचानक फोन-पे से सभी लेनदेन बंद हो गए। जानकारी लेने पर पता चला कि बैंक खाते में पंजीकृत मोबाइल नंबर बदल दिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने न तो मोबाइल नंबर बदलने के लिए कोई आवेदन दिया और न ही किसी को इसकी अनुमति दी। ऐसे में खाते से जुड़ा नंबर किसने, कब और किस प्रक्रिया के तहत बदला, यह जांच का विषय है।

शिकायत में उन्होंने बदलाव की तारीख, समय, अनुरोधकर्ता, सत्यापन दस्तावेज और संबंधित बैंक अधिकारी की जानकारी मांगी है। साथ ही पुराने नंबर को पुनः पंजीकृत करने और अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। यह मामला केवल एक मोबाइल नंबर बदलने तक सीमित नहीं है।

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बैंकिंग सुरक्षा में पहचान सत्यापन की भूमिका को देखते हुए इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि इसी तरह की अन्य शिकायतें भी सामने आती हैं तो यह किसी संगठित साइबर धोखाधड़ी या तकनीकी खामी की आशंका की दिशा में जांच का विषय बन सकता है।

एक नंबर बदलने से कैसे प्रभावित होती है बैंकिंग सुरक्षा?

बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर लेनदेन संबंधी अलर्ट, ओटीपी और डिजिटल बैंकिंग की कई महत्वपूर्ण सेवाओं का माध्यम होता है। इसमें अनधिकृत बदलाव होने पर खाताधारक को लेनदेन की सूचनाएं मिलना बंद हो सकता है। बैंकर्स क्लब के समन्वयक ललित अग्रवाल का कहना है कि कुछ परिस्थितियों में डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और खाते की निगरानी भी प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि मोबाइल नंबर बदलने की प्रक्रिया में ग्राहक की पहचान, आवेदन और सत्यापन की विश्वसनीयता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

जांच में इन छह सवालों के जवाब जरूरी

बैंकर्स क्लब समन्वयक ललित का कहना है कि इस मामले में सबसे अहम यह पता लगाना है कि मोबाइल नंबर बदलने का अनुरोध किस माध्यम से आया।

  • क्या इसके लिए लिखित आवेदन दिया गया था?
  • क्या केवाईसी दस्तावेजों का सत्यापन हुआ?
  • बदलाव किस कर्मचारी की लागिन आइडी से किया गया?
  • क्या ग्राहक के पंजीकृत नंबर पर कोई अलर्ट भेजा गया था?

इसके अलावा बैंक के सिस्टम लाग और संबंधित समय की डिजिटल गतिविधियों की जांच भी जरूरी है। इन्हीं तथ्यों से बदलाव की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

साइबर सुरक्षा में ग्राहक भी बरतें सावधानी

  • बैंक खाताधारकों को अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाले संदेशों और लेनदेन अलर्ट पर नजर रखनी चाहिए।
  • अचानक बैंकिंग संदेश बंद होने, ओटीपी नहीं आने या डिजिटल भुगतान सेवा बाधित होने पर तत्काल बैंक से संपर्क करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति को ओटीपी, यूपीआइ पिन या बैंकिंग पासवर्ड न बताएं।
  • मोबाइल नंबर में अनधिकृत बदलाव का संदेह होने पर बैंक में लिखित शिकायत दर्ज कर उसकी पावती लें
  • आवश्यकता पड़ने पर साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर भी सूचना दें।

वर्जन

एक शिकायत शाखा में प्राप्त हुई है। इसे गंभीरता से लेते हुए इसकी जांच की जा रही है। संबंधित खाताधारक को शनिवार को विस्तृत जानकारी के लिए बुलाया जाएगा, ताकि उनसे आवश्यक विवरण लेकर पूरे घटनाक्रम को समझा जा सके। बैंक रिकार्ड और संबंधित प्रक्रिया का परीक्षण करने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि मोबाइल नंबर किस वजह से और किन परिस्थितियों में बदला गया। जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी।

आरके त्रिपाठी, शाखा प्रबंधक, एसबीआइ तोरवा

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