
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रेलवे के हाई वोल्टेज बिजली तारों के बीच काम करना कर्मचारियों के लिए हमेशा जोखिम भरा होता है। जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में अब उनकी सुरक्षा के लिए तकनीक को सुरक्षा कवच बनाया जा रहा है। नवनिर्मित वंदे भारत ट्रेन मेंटेनेंस डिपो में कर्मचारियों को सेंसरयुक्त स्मार्ट हेलमेट से लैस किया जा रहा है। इसकी खासियत यह है कि हाई वोल्टेज ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) लाइन के नजदीक पहुंचते ही हेलमेट आवाज और रोशनी के जरिए खतरे का अलर्ट देगा। यानी खतरे का अहसास अब कर्मचारी को छूने से पहले ही हो जाएगा।

स्मार्ट हेलमेट
वंदे भारत ट्रेन मेंटेनेंस डिपो पुराने कोचिंग डिपो के नजदीक बनाया गया है। यहां कर्मचारियों की सुरक्षा का विशेष ख्याल रखा गया है। विशेषकर ऐसे कर्मचारी, जो इस ट्रेन का मेंटेनेंस करेंगे। इसमें सभी विभागों के कर्मचारी है। इस ट्रेन में एसी फिल्टर से लेकर अन्य जरुरी उपकरणों का मरम्मत ट्रेन की छत पर चढ़कर करना पड़ता है।
ट्रेन के ऊपर ओएचई तार होता है। जिसे देखते हुए ही इस सेंसरयुक्त हेलमेल की आवश्यकता महसूस की गई। हालांकि देश के इस चौथे वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो की खासियत यहां लगी रिट्रैक्टेबल ओवरहेड इलेक्ट्रिक (ओएचई) प्रणाली है। इसके जरिए छत पर मरम्मत और रखरखाव का काम करते समय बिजली के तारों को जरूरत के अनुसार हटाया जा सकता है।
पर कई बार अनजाने में कभी तार नहीं हटाया गया या फिर मरम्मत के लिए कर्मचारी ट्रेन की छत पर चढ़े हैं तो उस स्थिति में सेंसरयुक्त स्मार्ट हेलमेट उनकी सुरक्षा करेगा। कर्मचारियों को हेलमेट लगाकर ही मेंटेनेंस करने की अनिवार्यता भी की गई है।यह विशेष प्रकार का स्मार्ट हेलमेट रेलवे की ओवरहेड इलेक्ट्रिक लाइन के आसपास मौजूद उच्च वोल्टेज विद्युत क्षेत्र का पता लगाकर कर्मचारी को संभावित खतरे के प्रति सचेत करने में सहायक होगा।
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रेलवे के विद्युतीकृत रेलमार्ग हो या इस आधुनिक डिपो में सामान्यतः 25 किलोवोल्ट (25 हजार वोल्ट) एसी विद्युत प्रणाली का उपयोग किया जाता है। इस प्रणाली के अंतर्गत पटरियों के ऊपर लगे ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई ) के माध्यम से इलेक्ट्रिक इंजनों को बिजली की आपूर्ति होती है। ओएचई सेंसिंग हेलमेट में विशेष इलेक्ट्रानिक सेंसर लगाए जाते हैं, जो बिना तार को छुए उसके आसपास उपस्थित विद्युत क्षेत्र की पहचान कर सकते हैं। कर्मचारी के विद्युत खतरे वाले क्षेत्र के निकट पहुंचने पर यह उपकरण ध्वनि संकेत, चमकती लाइट अथवा कंपन के माध्यम से चेतावनी दे सकता है। बाक्स-
रेल प्रशासन के अनुसार इस हेलमेट का प्रमुख आधार नान-कान्टैक्ट इलेक्ट्रिक फील्ड सेंसिंग तकनीक है। विद्युत प्रवाहित ओएचई तारों के आसपास विद्युत क्षेत्र उत्पन्न होता है। हेलमेट में लगा सेंसर इस क्षेत्र को महसूस करता है और निर्धारित स्तर पर पहुंचने पर चेतावनी प्रणाली सक्रिय हो जाती है। कुछ उन्नत उपकरणों में खतरे के निकट पहुंचने के साथ चेतावनी संकेतों की आवृत्ति भी बढ़ सकती है।
रेलवे कर्मचारियों को हाई वोल्टेज बिजली के खतरे से बचाने के लिए नवनिर्मित वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो में विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत 20 नए हेलमेट खरीदकर उनमें विशेष इलेक्ट्रानिक सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर बिना बिजली के तार को छुए उसके आसपास मौजूद विद्युत क्षेत्र की पहचान कर सकते हैं। कर्मचारी जैसे ही हाई वोल्टेज तार से दो से पांच मीटर की दूरी के दायरे में पहुंचेगा, हेलमेट में लगा उपकरण आवाज और रोशनी के जरिए अलर्ट जारी करेगा। इससे कर्मचारियों को संभावित खतरे का पहले ही पता चल सकेगा और दुर्घटना की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।
ओएचई सेंसिंग हेलमेट एक अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण है, न कि विद्युत सुरक्षा प्रक्रियाओं का विकल्प। इसके उपयोग के बावजूद निर्धारित सुरक्षित दूरी, अधिकृत अनुमति, आवश्यक पावर ब्लाक, परमिट-टू-वर्क, विद्युत आपूर्ति का पृथक्करण एवं अर्थिंग सहित सभी निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। हेलमेट माउंटेड वोल्टेज सेंसर को किसी भी हेलमेट पर लगाया जा सकता है। अनुराग कुमार सिंह सीनियर डीसीएम, बिलासपुर रेल मंडल