
नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के नाम पर मरीजों की फर्जी भर्ती दिखाकर और कमीशनखोरी के जरिए सरकारी धन की बंदरबांट करने का बड़ा मामला सामने आया है। इस गंभीर गड़बड़ी के उजागर होने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।
शासन स्तर पर गठित विशेष जांच टीम ने आयुष्मान भारत से इलाज करने वाले बिलासपुर के कई निजी अस्पतालों की फाइलों और उपचार रिकार्ड की गहन छानबीन शुरू कर दी है, जिसमें शुरुआती जांच के दौरान तीन अस्पतालों द्वारा फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती दिखा कर क्लेम राशि हड़पने की पुष्टि हुई है।
इस पूरी कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि राज्य स्तर से आई इस उच्चस्तरीय टीम ने स्थानीय स्तर पर किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को शामिल नहीं किया। बिलासपुर की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा़ शुभा गरेवाल और आयुष्मान भारत के जिला प्रभारी शिशिर परमार ने इस संबंध में किसी भी प्रकार की आधिकारिक जानकारी होने से साफ इनकार किया है।
अधिकारियों का कहना है कि टीम ने निरीक्षण तो किया, लेकिन स्थानीय महकमे को इसकी जानकारी अब तक नहीं दी गई है। यही वजह है कि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन दोषी अस्पतालों के खिलाफ क्या और किस स्तर पर सख्त कार्रवाई की गई है।
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, आयुष्मान योजना में हो रही इस प्रकार की धांधली को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए यह जांच अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि मरीजों के नाम पर हो रहे इस अवैध खेल का दायरा पूरी तरह से साफ किया जा सके।
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि इस शुरुआती कार्रवाई के बाद अब शहर के कई बड़े और नामचीन निजी अस्पताल भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। जानकारों का मानना है कि जिस तरह से फर्जी क्लेम और कमीशनखोरी के तार जुड़ रहे हैं, उससे बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं मिलने की प्रबल आशंका जताई जा रही है।
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