नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल विवाद में नया मोड़, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार रहीं दुर्गावती उसारे के खिलाफ गोलबाजार थाने में दर्ज एफआईआर को रद्द कराने की मांग वाली याच...और पढ़ें
Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 02:37:54 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 02:37:54 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को भेजा नोटिस।
- विभागीय कार्रवाई के बाद आपराधिक मामला दर्ज कराना पड़ा भारी
- एफआईआर रद्द कराने की याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल की प्रभारी रजिस्ट्रार दुर्गावती उसारे के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि व्यक्तिगत द्वेष और दुर्भावना के चलते विभागीय कार्रवाई के बीच आपराधिक मामला दर्ज कराया गया।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल और मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की युगलपीठ में हुई।
फर्जी दस्तावेजों के पंजीयन से जुड़ा है मामला
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उनके खिलाफ एफआईआर 21 अप्रैल 2026 को गोलबाजार थाना रायपुर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत दर्ज की गई है। याचिका में एफआईआर और उससे जुड़ी आगे की समस्त कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर सचिव ने 7 अप्रैल 2026 के आदेश में उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही थी। इसके बाद उन्हें निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई। ऐसे में उसी घटनाक्रम को लेकर आपराधिक मामला दर्ज किया जाना दुर्भावनापूर्ण है।
समिति की जांच पर भी सवाल
याचिका के अनुसार, छत्तीसगढ़ नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल में प्रभारी रजिस्ट्रार रहते हुए 16 फरवरी 2026 को पंजीयन दस्तावेजों के सत्यापन के लिए एक समिति गठित की गई थी। याचिकाकर्ता का आरोप है कि समिति का गठन सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं किया गया और जांच भी उनकी अनुपस्थिति में की गई। उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना समिति ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर दी।
इसके बाद डॉ. निधि ग्वालरे, उप संचालक (नर्सिंग), स्वास्थ्य सेवा संचालनालय की ओर से 16 मार्च 2026 को विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इसके बाद उसी अधिकारी की ओर से आपराधिक शिकायत दर्ज कराकर एफआईआर कराई गई, जो उनकी पूर्व जांच और कार्रवाई की सिफारिश के विपरीत है।
पहले ही मिल चुकी है अग्रिम जमानत
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में हाई कोर्ट पहले ही 20 जुलाई 2026 को अग्रिम जमानत प्रदान कर चुका है।
हाई कोर्ट ने मामले में डॉ. निधि ग्वालरे, उप संचालक (नर्सिंग), स्वास्थ्य सेवा संचालनालय को नोटिस जारी किया है। नोटिस की तामील के बाद उन्हें निर्धारित अवधि में जवाब देना होगा। इसके बाद याचिकाकर्ता को एक सप्ताह में प्रत्युत्तर दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है। मामले की आगे सुनवाई जवाब दाखिल होने के बाद होगी।