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नवजात का पैर आ गया था बाहर, दहलीज पर नर्स बोली- डॉक्टर नहीं है, यहां से ले जाओ, बिलासपुर में मानवता शर्मसार

बिलासपुर जिला अस्पताल परिसर स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने व गैरजिम्मेदारी की हद पार करने वाली घटना सामने आई है।

By sandipYadavEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Sun, 31 May 2026 09:24:02 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 09:24:02 PM (IST)
नवजात का पैर आ गया था बाहर, दहलीज पर नर्स बोली- डॉक्टर नहीं है, यहां से ले जाओ, बिलासपुर में मानवता शर्मसार
आधा शरीर बाहर आने पर आनन-फानन में कराया गया प्रसव।

HighLights

  1. बिलालपुर में जच्चा-बच्चा अस्पताल में गैरजिम्मेदारी की हद पार
  2. गंभीर हालत में भी निजी अस्पताल ले जाने का बनाया गया दबाव
  3. आधा शरीर बाहर आने पर आनन-फानन में कराया गया प्रसव

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। जिला अस्पताल परिसर स्थित जच्चा-बच्चा अस्पताल में मानवता को शर्मसार करने व गैरजिम्मेदारी की हद पार करने वाली घटना सामने आई है। शनिवार की रात 10 बजे यहां डिलीवरी के लिए स्वजन के साथ पहुंची गर्भवती महिला के नवजात का पैर बाहर आ गया था। अस्पताल के बाहर नर्स ने आकर कहा कि अभी डाक्टर नहीं है, इसलिए यहां से ले जाएं। व्हीलचेयर पर ही जब नवजात का आधा शरीर बाहर आ गया तो फिर आनन-फानन में महिला को भर्ती कर प्रसव कराया गया।

गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थी महिला

बिल्हा ब्लाक के ग्राम सरवानी निवासी सनत कुमार केंवट अपनी गर्भवती पत्नी ममता केंवट को गंभीर स्थिति में डायल 112 की मदद से अस्पताल पहुंचे थे। पीड़िता की हालत इतनी नाजुक थी कि बच्चे का एक पैर पहले ही बाहर निकल चुका था। इस आपात स्थिति में भी अस्पताल में कोई जिम्मेदार डॉक्टर मौजूद नहीं था।


आधे प्रसव के बीच बाहर भेजने का प्रयास

ड्यूटी पर तैनात नर्स ने संवेदनहीनता की हदें पार करते हुए स्वजन से सीधे कह दिया कि इसे यहां से ले जाओ, यहां डिलीवरी नहीं होगी। विवश होकर स्वजन जब बेबस महिला को अस्पताल से बाहर ले जाने लगे, तो इस बीच बच्चे का आधा शरीर बाहर आ गया। यह देख वहां मौजूद अस्पताल के ही एक अन्य स्टाफ ने टोका कि इस हालत में मरीज को बाहर नहीं भेजा जा सकता।

आनन-फानन में कराया गया प्रसव

इसके बाद आनन-फानन में महिला को वापस प्रसव कक्ष ले जाया गया और बच्चे के सिर को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रसव के बाद नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वजन ने उसे तत्काल एक निजी अस्पताल के एनआइसीयू में भर्ती कराया है।

पीड़ित पिता का आरोप है कि जच्चा बच्चा अस्पताल में रात के वक्त डाक्टर तैनात नहीं रहते और नर्सें गंभीर मामला बताकर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने का मानसिक दबाव बनाती हैं।

भगवान भरोसे आपातकालीन सेवाएं

जच्चा-बच्चा अस्पताल में रात के वक्त स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुल गई है। प्रसव जैसे संवेदनशील मामले में आन-ड्यूटी डाक्टरों की मौजूदगी अनिवार्य होने के बावजूद, शनिवार रात पूरा वार्ड सिर्फ नर्सों के भरोसे था। नर्स ने रेफर करने की जल्दबाजी में प्रसूता और नवजात दोनों की जान को सीधे जोखिम में डाल दिया।

निजी अस्पतालों को फायदा पहुंचाने का खेल

पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरकारी अस्पताल का स्टाफ जानबूझकर ग्रामीण और गरीब मरीजों को डराता है। रात में आने वाले गंभीर केसों को अटेंड करने के बजाय सीधे निजी अस्पतालों में जाने की सलाह दी जाती है। डाक्टरों की यह अनुपस्थिति और स्टाफ का अमानवीय रवैया किसी बड़ी अनहोनी को खुला आमंत्रण दे रहा है।

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कमीशनखोरी के मामले आ चुके हैं सामने

जिला अस्पताल परिसर में सौ बिस्तर वाला आधुनिक मातृ-शिशु अस्पताल संचालित है, जहां निजी अस्पतालों से बेहतर एनआइसीयू और वेंटिलेटर की सुविधाएं हैं। वरिष्ठ डाक्टरों और स्टाफ की भारी-भरकम फौज होने के बावजूद नवजात को निजी अस्पताल भेजना प्रबंधन की विफलता और स्टाफ की सीधे तौर पर कमीशनखोरी की साठगांठ के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। इस मामले में भी हालात उसी तरह के हैं।

मामला बहुत ही संवेदनशील है। अस्पताल परिसर में ऐसी घटना नहीं होनी चाहिए थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कराएंगे।- संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर