रेलवे की लाइब्रेरी हुई आनलाइन, पढ़ना, घर ले जाना अब आसान
Railway News: रेलवे जोन मुख्यालय में अब ई-ग्रंथालय की सुविधा, किताबें एवं पत्रिकाएं भी आनलाइन उपलब्ध ...और पढ़ें
By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sat, 06 Jan 2024 11:10:03 AM (IST)Updated Date: Sat, 06 Jan 2024 11:10:03 AM (IST)
ई ग्रंथालयHighLights
- रेलवे जोन मुख्यालयों में अब ई-लाइब्रेरी की सुविधा
- रेलवे में वर्तमान में 36 लाइब्रेरी है जिनमें बिलासपुर मण्डल में 12
- हर विधा की हैं पुस्तकें
Bilaspur Railway News: दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय की लाइब्रेरी किताबें एवं पत्रिकाएं भी आनलाइन उपलब्ध हो गई हैं, जिसका उपयोग सदस्य आईडी एवं पासवर्ड के माध्यम से कर सकेंगे । सितंबर 2023 महीने में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय की लाइब्रेरी को नेशनल इंफर्मेटिक्स सेंटर (एनआइसी) द्वारा विकसित ई-ग्रंथालय से जोड़ा गया है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में वर्तमान में 36 लाइब्रेरी है जिनमें बिलासपुर मण्डल में 12, रायपुर रेल मण्डल में 12, नागपुर रेल मण्डल में 09 तथा 3 अन्य वैगन रिपेयर शॉप व मोती बाग कारखाने में अवस्थित है । इन सभी में वर्तमान में 23554 किताबें उपलब्ध हैं। लाइब्रेरी में मौजूद 11 हजार पुस्तकों के कैटलाग आनलाइन किए जा रहे है और किताबों को ईश्यू करने की प्रक्रिया व मेंबरशिप भी आनलाइन कर दी गई है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की स्थापना के साथ ही इस लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। अब ई-लाइब्रेरी के रूप में इसे नया स्वरूप दिया जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय की लाइब्रेरी को नेशनल इंफार्मेशन सेंटर (एनआइसी) के क्लाउड से जोड़ा गया है तथा उसके सर्वर के माध्यम से सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। भारतीय रेल पुस्तकालय और संसाधन केंद्र इस रेलवे ई-ग्रंथालय समूह का मुख्य केंद्र है। इसमें सभी रेलवे मुख्यालयों के पुस्तकालय ई-ग्रंथालय के माध्यम से जुड़े हुए है।
हर विधा की हैं पुस्तकें
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मुख्यालय की लाइब्रेरी में तकनीकी पुस्तकों के साथ ही रेल कर्मचारियों के ज्ञानवर्धन के लिए साहित्य, धर्म, दर्शनशास्त्र, यात्रा साहित्य, इतिहास तथा विज्ञान आदि विषयों की पुस्तकें हैं। इसके अलावा पत्रकारिता, भौतिक, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, कृषि विज्ञान, चिकित्सा शास्त्र, औषधि विज्ञान, ललित कला, प्रबंधन कला, शिक्षाशास्त्र व समाजशास्त्र और न्याय शास्त्र सहित अनेक विषयों पर भी पर्याप्त पुस्तकें हैं। अनेक प्रकार की पत्र-पत्रिकाएं एवं समाचारपत्र पढ़ने के लिए उपलब्ध रहते हैं।