छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग के सेवा मामलों में 2,797 प्रकरणों में ओआइसी नियुक्त, 1,712 में जवाब दाखिल
,712 मामलों में कोर्ट में जवाब दाखिल किया जा चुका है। ये मामले मुख्य रूप से संविलियन, पूर्व सेवा गणना, पदोन्नति और क्रमोन्नति से जुड़े हैं।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 10:04:07 PM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 10:04:07 PM (IST)
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- स्कूल शिक्षा विभाग के 2,797 मामलों में OIC नियुक्त।
- 1,712 सेवा संबंधी मुकदमों में कोर्ट में जवाब दाखिल।
- संविलियन, क्रमोन्नति व पदोन्नति को लेकर दर्ज हैं मामले।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े सेवा मामलों की न्यायालयों में पैरवी और जवाब दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, विभाग से संबंधित 2,797 प्रकरणों में अधिकारी-प्रभारी (ओआइसी) नियुक्त किए जा चुके हैं, जबकि 1,712 मामलों में न्यायालय के समक्ष जवाब दाखिल किया गया है।
इन आंकड़ों से विभागीय स्तर पर कानूनी मामलों की निगरानी और जवाब प्रस्तुत करने की कार्रवाई का पता चलता है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर विभाग के कुल लंबित मामलों की संख्या स्पष्ट नहीं होती। स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों से जुड़े विवादों में सेवा अवधि की गणना, क्रमोन्नति, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभ जैसे विषय शामिल हैं।
संविलियन के बाद पूर्व सेवा अवधि की गणना को लेकर भी विवाद सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में कर्मचारी अपनी सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाले लाभों की मांग करते हैं, जबकि संबंधित विभाग को नियमों के अनुरूप अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखना होता है।
समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और पदोन्नति के लाभ को लेकर भी शिक्षक और कर्मचारी न्यायिक मंचों का रुख करते हैं। इन मामलों में संबंधित सेवा नियमों, विभागीय आदेशों और कर्मचारियों की पात्रता के आधार पर विवाद का निराकरण होता है।
कानूनी मामलों की निगरानी महत्वपूर्ण
न्यायालयों में लंबित मामलों में समय पर जवाब दाखिल करना और आदेशों का पालन सुनिश्चित करना विभागीय प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। अधिकारी-प्रभारी की नियुक्ति से संबंधित मामलों की पैरवी की जिम्मेदारी तय होती है। वहीं, जवाब दाखिल होने के बाद भी मामले का अंतिम निराकरण न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करता है।