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नलों में नहीं टपकी एक बूंद: कागजों पर 'हर घर जल', तो 10 साल से प्यासे मेन्ड्रा का जिम्मेदार कौन?

बिलासपुर के तखतपुर विकासखंड के ग्राम मेन्ड्रा के वार्ड 4 और 5 में पिछले 10 वर्षों से पेयजल का भारी संकट है। 'हर घर जल' योजना के तहत पाइपलाइन और पानी ट...और पढ़ें

By kranti namdevEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 25 Jun 2026 01:07:16 PM (IST)Updated Date: Thu, 25 Jun 2026 01:07:16 PM (IST)
नलों में नहीं टपकी एक बूंद: कागजों पर 'हर घर जल', तो 10 साल से प्यासे मेन्ड्रा का जिम्मेदार कौन?
नल जल योजना के तहत कनेक्शन जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है।

HighLights

  1. ग्राम पंचायत मेन्ड्रा ने ठंडे बस्ते में डाली पेयजल समस्या
  2. पीएचई विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत की जांच की मांग
  3. मेन्ड्रा गांव में सिर्फ शोपीस बनी पानी की टंकी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: विकासखंड तखतपुर के ग्राम मेन्ड्रा में सरकारी दावों की पोल खुल गई है। यहां के वार्ड क्रमांक चार और पांच में पिछले 10 वर्षों से पेयजल का भारी संकट है। हर घर जल योजना के तहत गांव में पानी टंकी और पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नलों में आज तक पानी की एक बूंद नहीं टपकी है।

कलेक्ट्रेट के जनदर्शन में मंगलवार को ग्रामीण अपनी बुनियादी समस्याओं को लेकर पहुंचे। ग्राम मेन्ड्रा के वार्ड क्रमांक 5 के निवासी सूरज सूर्यवंशी के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रभारी कलेक्टर प्रकाश सर्वे को ज्ञापन सौंपकर पानी की किल्लत दूर करने की गुहार लगाई। ग्रामीणों ने बताया कि भीषण गर्मी के दौर में पानी की भारी किल्लत के कारण पूरा गांव परेशान है।


दैनिक निस्तार और पीने के पानी के लिए ग्रामीणों को दूर-दराज के खेतों और अन्य जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। पीड़ित ग्रामीणों के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर उन्होंने ग्राम पंचायत मेन्ड्रा में दो बार लिखित आवेदन देकर पानी की आपूर्ति बहाल करने की मांग की थी। इसके बावजूद पंचायत प्रशासन ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया और पेयजल संकट दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। पंचायत की इस निष्क्रियता और लापरवाही से नाराज होकर आखिरकार ग्रामीणों को कलेक्ट्रेट की शरण लेनी पड़ी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पाइपलाइन की तकनीकी खामियों को दूर कर जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे उग्र प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।

दफ्तरों के चक्कर काट रहे ग्रामीण

शिकायतकर्ता सूरज सूर्यवंशी ने बताया कि गांव में पानी की टंकी शोपीस बनकर रह गई है। कागजों पर योजना को पूरा दिखाकर अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि हकीकत में जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। दो बार पंचायत में लिखित शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं होना स्थानीय प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।

पीएचई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

हर घर जल योजना के तहत करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी मेन्ड्रा के दो वार्डों में पानी न पहुंचना लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण पाइपलाइन बिछाने में लापरवाही बरती गई है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

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