
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। बिलासपुर संभाग सहित पूरे प्रदेश में गायों के संरक्षण को लेकर सरकारें समय-समय पर करोड़ों रुपए की योजनाएं तैयार करती रही हैं, लेकिन उचित क्रियान्वयन के अभाव में ये दम तोड़ देती हैं। राज्य निर्माण के बाद से तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस की सरकारें आ चुकी हैं। दोनों ही कार्यकालों में भारी-भरकम राशि खर्च की गई, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस है और गौवंशी आज भी मुख्य सड़कों व नेशनल हाईवे पर जमावड़ा लगाए बैठे नजर आते हैं।
छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के साथ ही गायों के संरक्षण का मॉडल भी बदलता रहा है। पूर्ववर्ती डॉ. रमन सिंह की भाजपा सरकार ने अपने 15 वर्षों के कार्यकाल में गौशालाओं को अनुदान देने, गौ समृद्धि योजना से दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और गौ-सेवा आयोग के माध्यम से कड़े गो-वध विरोधी कानून (7 साल की कैद) लागू करने जैसे कदम उठाए थे। इसके बाद आई भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने नरवा, गरवा, घुरवा, बारी के तहत गोधन न्याय योजना की शुरुआत की, जिसमें 2 किलो गोबर और 4 लीटर गौमूत्र खरीदकर वर्मी कंपोस्ट बनाना शुरू किया गया।
वर्तमान विष्णुदेव साय सरकार ने सुरभि गौधाम योजना के तहत प्रदेश में 1,460 गौधाम बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें बिलासपुर जिले में पांच सुरभि गौधाम बन कर संचालित हो रहा है। इसके साथ ही कोटा जोगीपुर में 184 एकड़ में गौ अभ्यारण्य भी आकार ले रहा है। योजनाओं के लंबे सफर के बावजूद धरातल पर मवेशी सड़कों पर ही घूम रहे हैं।
राज्य शासन के निर्देश पर पूर्व में पशु चिकित्सा विभाग के माध्यम से सर्वे कराया था, जिसमें जिले के भीतर 5 लाख से अधिक गाय व भैंस पालतू पाए गए थे, जबकि बेसहारा मवेशियों की संख्या लगभग 35 हजार बताई गई थी। इन बेसहारा पशुओं के कारण नेशनल हाईवे और शहर की अंदरूनी सड़कों पर हर वक्त हादसे का खतरा बना रहता है। हाईवे पर तैनात की गई पेट्रोलिंग टीमें बेअसर साबित हो रही हैं, जिससे रात के वक्त मवेशी काल के गाल में समा रहे हैं और राहगीर भी गंभीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।
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जिले के 338 गौठानों में जड़े ताले, देखरेख का अभाव
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जिले में गायों के संरक्षण के उद्देश्य से करीब 338 गौठानों का निर्माण कराया था। सत्ता बदलते ही राजनीतिक उपेक्षा के चलते इनमें से अधिकांश गौठानों में ताले लटक चुके हैं, तो कई जगहों पर रसूखदारों द्वारा बेजा कब्जा कर लिया गया है। कांग्रेस कार्यकाल में बने होने के कारण वर्तमान प्रशासन इन संरचनाओं के रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
लाखासार से हुआ था सुरभि गौधाम योजना का आगाज
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मार्च 2026 में बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखंड अंतर्गत लाखासार गांव से सुरभि गौधाम योजना की प्रदेशव्यापी शुरुआत की थी। लगभग 25 एकड़ सरकारी भूमि पर बने इस मॉडल गौधाम के 19 एकड़ हिस्से में गायों के लिए वैज्ञानिक पद्धति से हरा चारा उगाया जा रहा है, जिसका संचालन स्थानीय कामधेनु गौशाला समिति के हाथ में है।
एनएच में पेट्रोलिंग भी ना काफी
एनएचएआई सड़को पर मवेशियों से होने वाली दुर्घटना को रोकने के लिए विभिन्न उपाय कर रही हैं, इनमें से एक पेट्रोलिंग टीम को सड़को से मवेशियों को हटाने का निर्देश भी शामिल है। पेट्रोलिंग टीम लगातार गायो को हटाने का काम कर रही है, बावजूद टीम के जाते ही मवेशी दुबारा सड़क पर आ जाते है। जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी हुई है।
गोअभ्यारण चार साल बाद भी अधूरा, तीन हजार गौ वंश रखने की है सुविधा
कोटा के जोगीपुर में 184 एकड़ में गोअभ्यारण आकार ले रहा है। यहां तीन हजार गौवंश को सुरक्षित रखने की सुविधा है। बाउंड्रीवाल का निर्माण पूरा नहीं होने से यह प्रोजेक्ट अटका हुआ है। हालांकि, फंड जारी होने के बाद अब काम शुरू होने का दावा है।
जिले में पांच गौधाम संचालित हो रहे हैं, सड़कों से मवेशियों को हटाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सड़कों पर मवेशी छोड़ने वाले आरोपित पशु मालिकों पर भी जुर्माना लगाया जा रहा है।
डा गोपाल शरण सिंह तंवर, संयुक्त संचालक बिलासपुर