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20 दिन में बदली पोस्टिंग, हाईकोर्ट ने कनिष्ठ को पद देने का आदेश किया रद

बिलासपुर हाईकोर्ट ने नारायणपुर वन मंडल के कर्मचारी नागेश कुमार समरथ के तबादले और उनके स्थान पर कनिष्ठ कर्मचारी राजूराम पोत्ताई की पदस्थापना के आदेश रद...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 05:23:52 PM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 05:23:52 PM (IST)
20 दिन में बदली पोस्टिंग, हाईकोर्ट ने कनिष्ठ को पद देने का आदेश किया रद
प्रतीकात्मक चित्र

HighLights

  1. 20 दिन में बदली पोस्टिंग, हाईकोर्ट ने रद की।
  2. कनिष्ठ को पद देने के लिए हुआ था तबादला।
  3. वरिष्ठ वन कर्मचारी को कोर्ट से मिली राहत।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट ने नारायणपुर वन मंडल में पदस्थ वन कर्मचारी नागेश कुमार समरथ के तबादले और उनके स्थान पर कनिष्ठ कर्मचारी की पदस्थापना के आदेश को मनमाना मानते हुए रद कर दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 12 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि कनिष्ठ कर्मचारी को उसी पद पर पदस्थ करने और वरिष्ठ कर्मचारी का तबादला करने के पीछे प्रशासनिक आवश्यकता का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया। यह कार्रवाई राज्य शासन की 14 जुलाई 2014 की नीति के विपरीत प्रतीत होती है।

याचिकाकर्ता नागेश कुमार समरथ की वर्ष 2006 में वनरक्षक के पद पर नियुक्ति हुई थी। वर्ष 2014 में पदोन्नति के बाद उन्हें 12 मार्च 2025 को उप वन क्षेत्रपाल के पद पर पदोन्नत किया गया। 1

9 जून 2026 को उन्हें नारायणपुर वन मंडल के पश्चिम सोनपुर वन परिक्षेत्र के कंडाड़ी में क्षेत्र सहायक पद पर पदस्थ किया गया। उन्होंने कार्यभार संभालकर काम भी शुरू कर दिया था। लेकिन 10 जुलाई 2026 को विभाग ने उन्हें पूर्वी सोनपुर क्षेत्र में क्षेत्र सहायक पद पर स्थानांतरित कर दिया। इसी दिन कनिष्ठ कर्मचारी वनपाल राजूराम पोत्ताई को कंडाड़ी के उसी पद पर पदस्थ करने का आदेश जारी किया गया।


याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट में दलील दी कि उनके तबादले का आदेश उन्हें सूचित किए जाने से पहले ही कनिष्ठ कर्मचारी की पदस्थापना का आदेश जारी कर दिया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि उन्हें हटाकर कनिष्ठ कर्मचारी को समायोजित करने के लिए कार्रवाई की गई। शासन ने तबादले को प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर उचित बताया।

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कोर्ट ने पाया कि आदेशों के क्रम से कनिष्ठ कर्मचारी को समायोजित करने की आशंका को बल मिलता है। विभाग ने वरिष्ठ कर्मचारी को हटाने के लिए कोई विशिष्ट प्रशासनिक आवश्यकता भी नहीं बताई। इस आधार पर हाई कोर्ट ने दोनों आदेश रद्द कर दिए। हालांकि, कोर्ट ने राज्य शासन को कानून के अनुसार नया आदेश जारी करने की छूट दी है।