छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का फैसला.. रेलवे भू-विस्थापित को मिलेगी नौकरी, एसईसीआर की याचिका खारिज
एसईसीआर की याचिका खारिज कर दी और 2019 की नई नीति को पुराने अधिग्रहणों पर लागू करने के तर्क को नकारते हुए कैट के 3 महीने में आदेश जारी करने के फैसले को बरकरार रखा।
Publish Date: Wed, 28 Oct 2026 09:10:30 PM (IST)Updated Date: Wed, 28 Oct 2026 09:10:30 PM (IST)
HighLights
- छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से रेलवे भू-विस्थापित को मिली बड़ी राहत।
- 2019 की नई नीति पुराने अधिग्रहणों पर लागू नहीं होगी।
- रेलवे की याचिका खारिज, 3 महीने में आदेश देने के निर्देश।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रेलवे परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहित होने पर रोजगार सहायता मांगने वाले भू-विस्थापित को हाई कोर्ट से राहत मिली है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की युगलपीठ ने रेलवे की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जमीन अधिग्रहण के समय लागू नीति के अनुसार ही रोजगार सहायता के दावे पर विचार किया जाएगा।
मध्य प्रदेश के सिवनी निवासी भारतलाल सनोडिया की जमीन रेलवे परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई थी। उन्होंने रोजगार सहायता की मांग की थी।केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर ने 12 अगस्त 2025 को रेलवे को उनके मामले पर दोबारा विचार करने का निर्देश दिया था।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट पहुंची रेलवे की दलील
पात्र पाए जाने पर तीन महीने के भीतर आवश्यक आदेश जारी करने को कहा गया था। रेलवे ने हाई कोर्ट में दलील दी कि 16 जुलाई 2010 की नीति के स्थान पर 11 नवंबर 2019 को नई नीति लागू की गई थी।
नई नीति में नौकरी के बजाय एकमुश्त नकद मुआवजे का प्रावधान है। इसलिए भारतलाल के मामले में भी नई नीति लागू होनी चाहिए।
अधिग्रहण के समय की नीति ही होगी लागू
हाई कोर्ट ने कहा कि भारतलाल की जमीन अधिग्रहित किए जाने के समय 2010 की नीति लागू थी। 11 नवंबर 2019 की नीति में स्पष्ट है कि वह जारी होने की तारीख से प्रभावी होगी। इसलिए उसे पहले हुए अधिग्रहण पर लागू नहीं किया जा सकता।
पीठ ने इसी विषय पर पहले दिए गए फैसले का हवाला देते हुए अधिकरण के आदेश को सही ठहराया। रेलवे को निर्धारित अवधि में पुनर्विचार की प्रक्रिया पूरी करनी होगी और भारतलाल पात्र पाए जाते हैं तो आवश्यक आदेश जारी करना होगा।