कैफे पर कार्रवाई से पहले नियमितीकरण आवेदन पर फैसला करे रायपुर नगर निगम, हाईकोर्ट का आदेश
बिलासपुर हाईकोर्ट ने रायपुर के डुमरतराई में कैफे पर बुलडोजर कार्रवाई से पहले नगर निगम को नियमितीकरण आवेदन पर 60 दिन के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।
Publish Date: Fri, 06 Nov 2026 04:13:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 06 Nov 2026 04:13:05 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- रायपुर के डुमरतराई कैफे निर्माण मामले में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला।
- नगर निगम को नियमितीकरण आवेदन पर 60 दिनों में लेना होगा निर्णय।
- तब तक कैफे पर किसी भी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई प्रतिबंधित।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: रायपुर के डुमरतराई स्थित कैफे निर्माण पर कार्रवाई के मामले में हाई कोर्ट ने नगर निगम को नियमितीकरण आवेदन पर पहले निर्णय लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कैफे संचालिका पूजा झमनानी को निर्धारित प्रारूप में जरूरी दस्तावेजों के साथ 10 कार्यदिवस के भीतर आवेदन देने को कहा।
निगम को आवेदन मिलने के बाद 60 कार्यदिवस में नियमानुसार निर्णय लेना होगा। तब तक निर्माण के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। पूजा ने याचिका में बताया कि नगर निगम के जोन क्रमांक-10 के जोन कमिश्नर ने 8 सितंबर और 5 अक्टूबर 2026 को नोटिस जारी कर सात दिन में निर्माण हटाने की चेतावनी दी थी।
खसरा नंबर 242/1 और 242/3, ग्राम डुमरतराई में स्थित निर्माण के नियमितीकरण के लिए 9 अक्टूबर 2026 को आवेदन दिया गया, लेकिन निर्णय से पहले ही तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू की जा रही थी।
निगम के अधिवक्ता ने कहा कि आवेदन निर्धारित प्रारूप में नहीं था और भवन का नक्शा सहित जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए गए। कोर्ट ने संचालिका को दस्तावेजों सहित विधिवत आवेदन देने और निगम को तय अवधि में निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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निर्माण कर लेने से कानूनी अधिकार नहीं
कोर्ट ने कहा कि केवल निर्माण कर लेने से कानूनी अधिकार नहीं मिलता। सुप्रीम कोर्ट के कनीज अहमद बनाम सबुद्दीन और राजेंद्र कुमार बरजात्या बनाम उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून का उल्लंघन कर बने निर्माण को नियमितीकरण की मांग से संरक्षण नहीं दिया जा सकता और अवैध निर्माण हटाना आवश्यक है। याचिका का निराकरण कर दिया गया।