• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • दिवाली पूजन 2026
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

CG हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की दो टूक: 'बेंच हंटिंग' रोकने वाला सर्कुलर अदालती कामकाज में दखल नहीं

बेंच ने कहा है कि बेंच हंटिंग को लेकर जारी सर्कुलर न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सावधानी की सूचना है।

By Anil KurreEdited By: Akash Pandey
Publish Date: Sun, 03 May 2026 09:30:26 PM (IST)Updated Date: Sun, 03 May 2026 09:30:26 PM (IST)
CG हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की दो टूक: 'बेंच हंटिंग' रोकने वाला सर्कुलर अदालती कामकाज में दखल नहीं
सर्कुलर का उद्देश्य निष्पक्ष न्याय, हस्तक्षेप नहीं: हाई कोर्ट

HighLights

  1. सर्कुलर का उद्देश्य निष्पक्ष न्याय, हस्तक्षेप नहीं: हाई कोर्ट
  2. जज का सुनवाई से हटना अनिवार्य नहीं बताया गया
  3. बेंच हंटिंग रोकने के लिए जारी किया गया सर्कुलर

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा है कि बेंच हंटिंग को लेकर जारी सर्कुलर न्यायिक अनुशासन बनाए रखने के लिए सावधानी की सूचना है, सुनवाई से हटना अनिवार्य नहीं है। एक दंपती के मामले में सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने कहा कि हाल ही में जारी सर्कुलर का मतलब केवल निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है, न कि अदालती कामकाज में हस्तक्षेप करना।

17 अप्रैल 2026 को यह मामला एक अन्य डिवीजन बेंच में सुनवाई के लिए प्रस्तुत हुआ था। इस दौरान बेंच के एक सदस्य ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। आदेश में 16 अप्रैल को जारी सर्कुलर पर टिप्पणी करते हुए कहा गया था कि यह कोर्ट के कामकाज में हस्तक्षेप जैसा प्रतीत होता है। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए अलग बेंच तय करने के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष पेश करने को कहा गया था।


बेंच चुनने की कोशिशों को रोकना

29 अप्रैल को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने इस मामले में कहा कि सर्कुलर का मतलब साफ है कि बेंच हंटिंग यानी अपनी पसंद की बेंच चुनने की कोशिशों को रोकना है। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोर्ट अनजाने में किसी निहित स्वार्थ वाले पक्षकार का हथियार न बन जाए। यह सर्कुलर किसी जज को हटने के लिए मजबूर नहीं करता, केवल सतर्क रहने के लिए एक नोट ऑफ कॉशन है।

क्या है बेंच हंटिंग

बेंच हंटिंग ऐसा प्रयास है, जहां पक्षकार अपना मामला अपनी पसंद के किसी विशेष जज या बेंच के समक्ष लगवाने का प्रयास करते हैं। हाई कोर्ट ने इसे खतरा मानते हुए आगाह किया है। सर्कुलर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बेंच किसी भी तरह से पक्षकारों के प्रभाव में न आए। ऐसा लगे कि बेंच हंटिंग का प्रयास किया जा रहा है, तो वे मामले से खुद को अलग करने का निर्णय भी ले सकते हैं।

यह है मामला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बीते सप्ताह रजिस्ट्रार (ज्यूडिशियल) द्वारा जारी सर्कुलर पर कड़ी आपत्ति जताई थी। यह सर्कुलर सुनवाई से हटने के नियमों से जुड़ा था। डिवीजन बेंच ने इसे कोर्ट के कामकाज में दखलंदाजी बताया है। यह टिप्पणी तब आई, जब जस्टिस संजय एस अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की डिवीजन बेंच ने वैवाहिक अपील की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि बेंच के एक पीठासीन जज की भतीजी इस मामले में बतौर वकील पेश हुई थी, हालांकि वह जूनियर वकील थीं।

यह भी पढ़ें- रायपुर IPL मुकाबलों के टिकट बुकिंग शुरू: RCB ने जारी किया शेड्यूल, डिजिटल एम-टिकट OR से ही मिलेगी एंट्री

एक क्लिक पर पढ़ें मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लेटेस्ट खबरें। Hindi News पढ़ें। MP News, Chhattisgarh news, आज का राशिफल और आज का मौसम से जुड़ी ताजा जानकारी पढ़ें।