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नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल से जुड़े शिक्षक नंदकुमार वर्मा को ग्रेच्युटी की राशि नहीं मिलने पर हाई कोर्ट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को 30 दिन के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने कहा कि जब ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकारी का आदेश सक्षम उच्च मंच पर चुनौती नहीं दी गई है, तो अधिकारियों की ओर से उसका पालन नहीं करने के आधार पर याचिकाकर्ता को लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम कोसमंदी निवासी नंदकुमार वर्मा 100 प्रतिशत सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल में शिक्षक के रूप में कार्यरत थे। ग्रेच्युटी भुगतान प्राधिकारी ने 4 सितंबर 2023 को उनके पक्ष में 19 लाख 92 हजार 217 रुपये की ग्रेच्युटी देने का आदेश पारित किया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, राज्य के अधिकारियों ने इस आदेश को किसी उच्च मंच पर चुनौती नहीं दी, लेकिन इसके बावजूद राशि का भुगतान नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि ग्रेच्युटी की वसूली के लिए राजस्व वसूली प्रमाणपत्र भी जारी किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी ने 28 जनवरी 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय के माध्यम से ग्रेच्युटी की राशि जारी करने के लिए पत्र भी भेजा था। इसके बाद भी भुगतान नहीं हुआ।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि संबंधित स्कूल भुगतान एवं ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972 की धारा 1(3)(ग) के दायरे में आने वाले संस्थानों की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए प्राधिकारी को आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।
हाई कोर्ट ने पाया कि 4 सितंबर 2023 के आदेश को सक्षम उच्च मंच पर चुनौती नहीं दी गई है और राशि की वसूली के लिए प्रमाणपत्र भी जारी हो चुका है। अदालत ने याचिका का निराकरण करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर प्राधिकारी के आदेश के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान सुनिश्चित करें।
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