
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। पेयजल में मलमूत्र मिश्रित धीमा जहर लोगों को बीमार कर रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर नगर निगम क्षेत्र में उल्टी-दस्त से 16 लोगों की मौत का मामला सामने आने के बाद बिलासपुर की स्थिति भी गंभीर मानी जा रही है। शहर में अब भी 267 स्थानों पर पेयजल पाइप लाइनें नालियों और नालों के बीच से होकर गुजर रही हैं।
सर्वेक्षण में यह पाया गया था कि 59 वार्डों में पाइप लाइनें नालियों में डूबी हुई हैं, जिससे मलमूत्र युक्त गंदे पानी की सप्लाई और डायरिया फैलने की आशंका बनी रहती है। तालापारा और तारबाहर क्षेत्रों में पहले भी दूषित पानी के कारण उल्टी-दस्त की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
10 वर्षों में 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च
नगर निगम ने बिलासपुर की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए पिछले 10 वर्षों में 400 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। वर्ष 2007 से 2017 के बीच जल आवर्धन योजना में 81 करोड़ और अमृत मिशन के तहत 100 करोड़ रुपये खर्च कर 276 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई, लेकिन इसके बावजूद शहरवासियों को शुद्ध पेयजल के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
शहर के अधिकांश हिस्सों में जल वितरण की बड़ी समस्या यह है कि दो से तीन अलग-अलग योजनाओं की पाइप लाइनें एक ही स्थान पर बिछी हुई हैं। कर्मचारियों के अनुसार, जंग लगी पुरानी पाइप लाइनों और नई पाइप लाइनों के उलझाव के कारण लीकेज सुधारने में घंटों का समय लग जाता है, जिससे जलापूर्ति बाधित होती है।
चार किमी पाइप लाइन बदली जाने का दावा
नगर निगम के कार्यपालन अभियंता अनुपम तिवारी ने बताया कि शहरी क्षेत्र में लगभग चार किलोमीटर तक की पाइप लाइन नाली और नालों से होकर गुजर रही थी, जिन्हें बदलकर दुरुस्त कर लिया गया है। इसके अलावा अमृत मिशन के तहत शहर की 200 किलोमीटर से अधिक पाइप लाइन बदली जा चुकी है। अधिकांश पुरानी पाइप लाइनें, जो नालियों के ऊपर या भीतर से गुजर रही थीं और जिनसे संक्रमण की संभावना बनी रहती थी, अब बदल दी गई हैं।
अमृत मिशन के बिरकोना प्लांट में क्षतिग्रस्त वाल की मरम्मत
बिरकोना स्थित अमृत मिशन योजना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में वाल फटने से पानी की सप्लाई पूरी तरह प्रभावित हो गई है। नगर निगम ने शहरी क्षेत्र के लगभग 40 हजार घरों में 22 टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाने की व्यवस्था शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार वाल की मरम्मत कर ली गई है, लेकिन उसे पूरी तरह सूखने में सात दिन का समय लग सकता है।
31 दिसंबर की रात से शुरू हुई इस समस्या के कारण अशोक नगर और बिरकोना स्थित फिल्टर प्लांट से जलापूर्ति बाधित है। निगम ने पानी की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए 122 पुराने पम्प चालू किए, लेकिन अधिकांश पम्पों से पानी की जगह हवा निकल रही है। जलस्तर गिरने और तकनीकी कारणों से स्थिति और बिगड़ गई है।
शहर के तालापारा, सरकंडा, जरहाभाठा, सिविल लाइन सहित अन्य घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जल संकट गहरा गया है। फिलहाल नगर निगम 22 टैंकरों के जरिए विभिन्न वार्डों में पानी की आपूर्ति कर रहा है। जब तक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह से दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक टैंकरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे ने प्लांट का निरीक्षण कर वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखने और प्रभावित क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों का क्या कहना
प्रकाश सर्वे, नगर निगम आयुक्त, बिलासपुर का कहना है कि "वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आई खराबी की वजह से पानी सप्लाई में थोड़ी समस्या आ रही है। पुराने पम्प चालू कर दिए गए हैं। टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। दो से तीन दिनों में स्थिति पर काबू पा लिया जाएगा और अमृत मिशन का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट दोबारा शुरू हो जाएगा।"