बिलासपुर में सड़क हादसों का कहर; 300 मौतों के बाद प्रशासन सख्त, सरकारी कर्मियों के लिए हेलमेट अनिवार्य
जिले में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। जिले में सालाना 300 से अधिक लोगों की सड़क हादसों में मौत हो रही है, जिनमें से अधिकांश की मौत सिर में गंभीर चोट लगने के कारण होती है। इसे रोकने के लिए प्रशासन ने अब सरकारी दफ्तरों में हेलमेट अनिवार्य करने की मुहिम शुरू की है।
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 03:33:46 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 03:33:46 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- बिलासपुर कलेक्टर ने की हेलमेट पहनने की अपील।
- जिले के सभी विभाग प्रमुखों को सौंपी गई जिम्मेदारी।
- दफ्तरों में बिना हेलमेट आने वाले वाहन चालकों पर रहेगी नजर।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः जिले में लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली असमय मौतों का आकंडा तेजी से बढ़ रहा है। दुर्घटना के दौरान सिर पर लगी चोट से सर्वाधिक मौत को देखते हुए कलेक्टर ने अब अधिकारियों व कर्माचरियों से अपील की है कि वे दुर्घटना से बचने से हेलमेट का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करें और अपने जानने वालो को हेलमेट लगाने जागरूक करें, जिससे दुर्घटना में मौतो का आंकडा कम किया जा सके। जिले में सड़क हादसे से बढ़ते मौत के आंकडे डराने वाले हैं।
हर साल दुर्घटना में मौत का आकंडा 300 या फिर उसके पार चला जाता है। वर्ष 2025 में भी लगभग 300 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में असामयिक मृत्यु हुई है। जांच में यह बात सामने आई कि इनमें से अधिकांश मौतें सिर पर गंभीर चोट लगने के कारण हुईं, जिन्हें यदि यातायात नियमों का पालन करते हुए हेलमेट पहना होता तो संभवतः मौतों के आंकडों को कम किया जा सकता था। जिले में मोटरयान अधिनियम 1988 के कड़े प्रविधानों का हवाला देते हुए अब कलेक्टोरेट सहित जिले के सभी सरकारी दफ्तरों में हेलमेट को अनिवार्य रूप से प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की मुहिम के तहत सभी विभाग प्रमुखों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे न केवल अपने मातहत काम करने वाले कर्मचारियों, बल्कि दफ्तरों में आने वाले नागरिकों को भी हेलमेट पहनने के लिए प्रोत्साहित करें। कलेक्टर ने अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटनाएं केवल एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि उसके पूरे हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर देती हैं। सुरक्षित यात्रा और जिम्मेदार नागरिकता का यह संकल्प बिलासपुर की सड़कों पर होने वाली जनहानि को कम करने की दिशा में एक बड़ा और मील का पत्थर साबित होगा।
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हेलमेट अनिवार्यता को लेकर प्रशासन का तर्क
- मोटर यान अधिनियम के तहत कड़ाई- प्रशासन ने साफ किया है कि मोटर यान अधिनियम 1988 के तहत दुपहिया चालकों के लिए हेलमेट लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। अब सरकारी दफ्तरों में बिना हेलमेट के आने वाले दोपहिया वाहनों पर नजर रखी जाएगी।
सिर की गंभीर चोटों से सुरक्षा- डाक्टरों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार, हेलमेट दुर्घटना के दौरान सिर को गंभीर और जानलेवा चोटों से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह सड़क पर होने वाली मृत्यु की आशंका को काफी हद तक कम कर देता है।
परिवारों को पीड़ा से बचाने की अपील- जिला प्रशासन ने बिलासपुर के सभी आम नागरिकों से भावुक अपील की है कि वे खुद तो हेलमेट पहनें ही, साथ ही अपने परिवार, दोस्तों और परिचितों को भी सुरक्षित सफर के लिए हेलमेट लगाने के लिए अनिवार्य रूप से प्रेरित करें। वर्जन-- सड़क हादसों में होने वाली जनहानि को रोकने के लिए सभी विभाग प्रमुखों के अपील की गई है कि वे यातायात के नियमों का पालन करें। दफ्तरों में हेलमेट उपयोग को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। जिससे दुर्घटना होने की स्थिति में जनहानि को कम किया जा सके, क्योकी सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर