
नईदुनिया प्रतिनिधि,बिलासपुर। जिले के मुख्य मार्गों और वार्डों की अंदरूनी सड़कों का कायाकल्प डामर की बढ़ती कीमतों और न मिलने के कारण पूरी तरह ठप हो गया है। ठेकेदारों द्वारा काम बंद दिए जाने से पुराना बस स्टैंड, 27 खोली और अग्रसेन चौक, मोपका व अन्य मार्ग की व्यस्त सड़कें बदहाल पड़ी हैं। मानसून सिर पर है और निर्माण कार्य अटकने से बारिश में स्थिति और भयानक होने की आशंका बढ़ गई है।
पीडब्ल्यूडी, नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर के आंतरिक नेटवर्क और मुख्य मार्गों के डामरीकरण के लिए करीब 50 करोड़ से अधिक रुपये का संचयी बजट स्वीकृत किया गया था। वित्तीय व्यवस्था होने के बावजूद धरातल पर काम पूरी तरह ठप पड़ा है। इसका मुख्य कारण टेंडर पास होने के बाद डामर के दामों में आया भारी उछाल है। ठेकेदारों का साफ कहना है कि वर्तमान दरों पर काम करना घाटे का सौदा है, इसलिए वे स्वीकृत बजट से 20 से 30 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
दरें समायोजित न होने के कारण ठेकेदारों ने फिलहाल हाथ खींच लिए हैं, इधर जून का महीना आधा बीत चुका है और कभी भी भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। यदि बारिश से पहले गड्ढों को नहीं भरा गया और डामरीकरण नहीं हुआ, तो पूरी सड़क पानी में बह जाएगी और शहर की आधी आबादी का पैदल चलना भी दूभर हो जाएगा।
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कायाकल्प फंड से अटकी यह सड़के
सरकार ने दी राहत लेकिन स्पष्ट गाइड लाइन नहीं
डामर की कीमत 40 हजार मिट्रिक टन थी जो बढ़ कर 93 हजार मिट्रिक टन पहुंच गई है। ठेकेदारो ने बढ़ी हुई कीमत को समायोजन करने की मांग की थी। शासन ने ठेकेदारो को राहत देने के लिए कायाकल्प योजना के तहत री-टेंडर करने की घोषणा की है, लेकिन स्पष्ट गाइड लाइन न आने की वजह से काम अटका हुआ है।
वर्जन..
युद्ध की वजह से डामर का मूल्य डबल से भी ज्यादा हो चुका है। दूसरी तरफ डामर मिल भी नहीं रहा है। राज्य सरकार की ओर से समायोजन को लेकर घोषणा की गई हैं। लेकिन डामर न होने की काम सारे बंद है। डामर उपलब्ध होने और समायोजन को लेकर स्पष्ट गाइड लाइन आने के बाद दुबारा काम शुरू हो जाएगा।
सौरभ मिश्रा, जिला अध्यक्ष पीडब्ल्यूडी ठेकेदार संघ