
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। आरपीएफ ने अंतरराज्यीय टिकट दलाल गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। टिकट दलाली का यह जाल छत्तीसगढ़ के बैकुंठपुर से उत्तर प्रदेश के बनारस तक फैला हुआ था। सिटी पीआरएस से टिकट बनाकर बस के जरिए बनारस दलालों को भेजा जाता था। गिरफ्तार आरोपितों में पीआरएस कर्मचारी के अलावा बस चालक भी शामिल है।
रेलवे के आरक्षण केंद्र (पीआरएस) में तो लगातार जांच और कार्रवाई के कारण काफी हद तक टिकट दलाली पर अंकुश लग गया है, लेकिन सिटी पीआरएस में यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा था। सिटी पीआरएस जिला प्रशासन के सहयोग से संचालित होता है। यहां कर्मचारी भी प्रशासन की ओर से संविदा पर रखे जाते हैं। बैकुंठपुर में भी सिटी पीआरएस है। यहां टिकटों की दलाली होने की लगातार आरपीएफ को सूचना मिल रही थी।
इसी के तहत बिलासपुर रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त सौरव कुमार के नेतृत्व में रेलवे आरक्षित टिकटों की अनाधिकृत खरीद-बिक्री के विरुद्ध अभियान चलाया गया। इसके तहत ही आरपीएफ निरीक्षक अंबिकापुर सुनीता मिंज ने बैकुंठपुर के सिटी पीआरएस की जांच कराई। साथ ही मुखबिर भी लगाए गए। इस दौरान पता चला कि सिटी पीआरएस से बनारस/भदोही (उत्तर प्रदेश) तक टिकट दलाली नेटवर्क फैला हुआ है।
जांच में यह जानकारी सामने आई कि सिटी पीआरएस के संविदा कर्मचारी द्वारा टिकट तैयार कर बनारस भेजा जा रहा और वहां दलाल द्वारा ग्राहकों को अधिक कीमत पर टिकट उपलब्ध कराते हैं। यह भी उजागर हुआ कि बस चालक के माध्यम से टिकट पहुंचाया जाता है। इस पर आरोपितों को गिरफ्तार करने जाल बिछाया गया और इसमें शामिल तीन आरोपित सिटी पीआरएस का संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार निवासी कोरिया, संजय विश्वकर्मा निवासी भदोही, उत्तर प्रदेश और बस ड्राइवर रवि शंकर निवासी सूरजपुर को पकड़ लिया गया। मामले में आरोपितों के खिलाफ रेल अधिनियम की धारा 143 के तहत अपराध दर्ज कर लिया गया है।
जांच के दौरान आरोपितों के मोबाइल फोन से व्हाट्सएप चैट के जरिए 60 रेलवे आरक्षित टिकटों से जानकारी सामने आई। इन टिकटों की कीमत करीब 3.68 लाख रुपये बताई गई है। इनमें 14 टिकटों पर पीएनआर और अन्य विवरण हस्तलिखित पाए गए। जांच में सामने आया कि गिरोह रेलवे टिकटों पर अवैध रूप से कमीशन और अतिरिक्त राशि वसूलकर मुनाफा कमा रहा था।
रेलवे आरक्षित टिकटों से जुड़े मामले में बरामद सामग्री के आधार पर जांच तेज कर दी है। जांच टीम अब गिरोह की गतिविधियों के साथ टिकटों की खरीद-फरोख्त में शामिल अन्य लोगों की भूमिका खंगाल रही है। आरोपितों के मोबाइल से मिली व्हाट्सएप चैट और टिकटों से संबंधित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है। आरपीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क कहां तक फैला है और इसमें कितने लोग शामिल हैं। टिकटों पर अवैध कमीशन व अतिरिक्त राशि वसूले जाने की जानकारी के बाद लेन-देन से जुड़े साक्ष्यों को भी जुटा रही है।