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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से NIT रायपुर को झटका, बिना शो-कॉज नोटिस कंपनी को किया था ब्लैकलिस्ट, कोर्ट ने रद किया आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध के दौरान कमियों के लिए जारी नोटिस को ब्लैकलिस्टिंग के लिए विशिष्ट शो-कॉज नोटिस नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ब्लै...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Nitin Kumar
Publish Date: Sat, 22 Aug 2026 12:13:46 PM (IST)Updated Date: Sat, 22 Aug 2026 12:39:42 PM (IST)
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से NIT रायपुर को झटका, बिना शो-कॉज नोटिस कंपनी को किया था ब्लैकलिस्ट, कोर्ट ने रद किया आदेश
बिलासपुर उच्च न्यायालय ने NIT रायपुर को दिया झटका

HighLights

  1. NIT रायपुर को हाईकोर्ट से लगा बड़ा झटका
  2. अब बिना नोटिस ब्लैकलिस्ट नहीं होगी कंपनी
  3. सिविल डेथ के समान माना गया ब्लैकलिस्टिंग

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (एनआईटी) रायपुर द्वारा सुरक्षा और हाउसकीपिंग सेवा देने वाली कंपनी को बिना उचित सुनवाई के एक साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद कर दिया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 19 दिसंबर 2025 के ब्लैकलिस्टिंग आदेश को निरस्त करते हुए कहा कि ठेकेदार की प्रतिष्ठा और भविष्य के सरकारी ठेकों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि ठेकेदार को काम के दौरान कमियों के लिए पहले नोटिस या चेतावनी दी गई हो, तो भी यह ब्लैकलिस्टिंग के लिए आवश्यक प्राकृतिक न्याय की प्रक्रिया नहीं है। संबंधित संस्था को पहले यह बताना आवश्यक है कि उसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव है और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

मामला इंदौर की कामथेन सिक्योरिटी सर्विस से जुड़ा है, जिसने एनआईटी रायपुर की निविदा में सफल होकर फरवरी 2024 में सेवाएं शुरू की थीं। कंपनी ने मार्च 2024 से फरवरी 2025 तक काम किया, लेकिन कई मासिक बिलों का भुगतान लंबित रहा।


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एनआईटी ने नवंबर 2024 में जीएसटी और श्रम भुगतान से संबंधित मुद्दों पर पत्र जारी किया था। कंपनी ने लंबित बिलों का भुगतान करने का अनुरोध किया, जिसके बाद कुछ भुगतान जारी हुआ।

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उन्हें 19 दिसंबर 2025 के ब्लैकलिस्टिंग आदेश की जानकारी आठ महीने बाद मिली, जब एक प्रतिस्पर्धी कंपनी ने दतिया जिले में एक टेंडर में आपत्ति दर्ज कराई। कंपनी का तर्क था कि अनुबंध फरवरी 2025 में समाप्त हो चुका था और उसे कोई शो-कॉज नोटिस नहीं दिया गया।

सिविल डेथ माना गया ब्लैकलिस्टिंग

हाईकोर्ट ने कहा कि अनुबंध के दौरान कमियों के लिए जारी नोटिस को ब्लैकलिस्टिंग के लिए विशिष्ट शो-कॉज नोटिस नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि ब्लैकलिस्टिंग को सिविल डेथ के समान माना गया है, जिसका सीधा असर सरकारी टेंडर में भाग लेने और भविष्य में ठेके प्राप्त करने की क्षमता पर पड़ता है। कोर्ट ने एनआईटी को कार्रवाई से वंचित नहीं किया है।

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