बिलासपुर तहसील के स्ट्रांग रूम में कैद हैं स्टांप टिकट, दो महीने से चक्कर काट रहे लोग, जाति प्रमाण पत्र और जमीन के जरूरी काम पड़े ठप
बिलासपुर कलेक्ट्रेट की नकल शाखा में इन दिनों गंभीर लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती देखने को मिल रही है। मिसल, बी-1 और खसरा-खतौनी जैसी जरूरी दस्तावेजों की...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 09:46:15 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 09:46:15 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- बिलासपुर कलेक्ट्रेट में प्रशासनिक सुस्ती और लापरवाही के कारण परेशान हो रहे सैकड़ों आम नागरिक।
- समय पर प्रमाणित नकल न मिलने से युवाओं के दाखिले और किसानों के लोन लटके।
- कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश के बाद भी नकल शाखा के कामकाज में नहीं आ रहा सुधार।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। कलेक्ट्रेट परिसर की नकल शाखा इन दिनों आम जनता की बेबसी और बेलगाम लिपिक तंत्र की संवेदनहीनता का सबसे दर्दनाक आईना बन चुकी है। मिसल, बी-1 और खसरा खतौनी की नकल हासिल करने पहुंचे गरीब ग्रामीणों को पिछले दो-तीन माह से काफी परेसानी झेलनी पड़ रही है। विडंबना यह है कि हफ्तों की बहानेबाजी के बाद कोषालय में स्टांप टिकट पहुंच चुके हैं, फिर भी वितरण ठप रखकर जनता को दर-दर भटकाया जा रहा है।
हाथ में पुरानी अर्जियां, आंखों में बेबसी और जेब में किराया लेकर रोजाना सैकड़ों किसान, अभिभावक व अन्य कलेक्ट्रेट की चौखट नाप रहे हैं। बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बनवाने हों या बुजुर्गों की पैतृक जमीन का सीमांकन, सुबह से भूखे-प्यासे कतार में खड़े रहने के बाद खिड़की पर सिर्फ दुत्कार और खाली कुर्सियां मिलती हैं। महीनों तक टिकट न होने का हवाला देकर वापस भेजा गया। अब जब कोषालय के स्ट्रान्ग रूम में टिकटों की पेटियां पहुंच चुकी हैं, तब भी लिपिक फाइल आगे बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
निगरानी के अभाव में पूरी व्यवस्था बिचौलियों और हीलाहवाली की भेंट चढ़ चुकी है। समय पर प्रमाणित नकल न मिलने के कारण नौजवानों के दाखिले छूट रहे हैं, किसान क्रेडिट कार्ड खारिज हो रहे हैं और अदालतों में इंसाफ की गुहार तारीखों के बोझ तले दबती जा रही है। यह केवल एक कागज का टोटा नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा आम इंसान के जीने के हक पर लगाया गया निर्मम ताला है।
कोषालय और नकल शाखा हैं अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार
इस पूरे संकट के लिए जिला कोषालय का सुस्त रवैया और कलेक्ट्रेट की नकल शाखा का गैर-जिम्मेदाराना समन्वय सीधे तौर पर जिम्मेदार है। मुख्यालय से स्टांप टिकट शुक्रवार को ही पहुंच चुका हैं, मगर स्ट्रान्ग रूम से काउंटर तक टिकट पहुंचाने में हफ्तों लगा दिए गए। वहीं नकल शाखा के लिपिक खिड़की से नदारद रहकर जनता के जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।
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बी-1, पांचशाला व मिसल न मिलने से ये काम हो रहे ठप
- जाति प्रमाण पत्र रद्द होने की कगार: वर्ष 1950-51 या 1954-55 के मिसल और बी-1 रिकार्ड के बिना छात्र-छात्राओं के स्थायी जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं।
- जमीन की रजिस्ट्री और खरीदी-बिक्री ठप: चालू वर्ष का सत्यापित खसरा और बी-1 न मिलने से रजिस्ट्री कार्यालयों में जमीन का अंतरण व नामांतरण पूरी तरह अटक गया है।
- बैंक लोन और किसान क्रेडिट कार्ड अटके: बैंकों से कृषि ऋण अथवा व्यवसाय के लिए लोन स्वीकृत कराने हेतु अद्यतन पांचशाला व खतौनी नकल न मिलने से फाइलें रिजेक्ट हो रही हैं।
- किसान न्याय योजना और सब्सिडी पर ब्रेक: समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए पंजीयन, पीएम किसान सम्मान निधि और सरकारी इनपुट सब्सिडी के आवेदन बिना दस्तावेज निरस्त हो रहे हैं।
- राजस्व अदालतों में इंसाफ की गुहार बेअसर: तहसील और एसडीएम कोर्ट में चल रहे जमीनी विवादों में नकल पेश न होने से तारीखें बढ़ रही हैं और किसानों पर अदालती खर्च बढ़ रहा है।
- बंटवारा, सीमांकन और फौती प्रकरण लटके: पैतृक संपत्ति के पारिवारिक बंटवारे, जमीन की सरकारी नपाई-सीमांकन और फौती नामांतरण के सारे प्रकरण टेबल पर धूल फांक रहे हैं।
- शासकीय मुआवजा और पुनर्वास दावा फंसा: सड़क, रेलवे या नहर परियोजनाओं में अधिग्रहित जमीनों के एवज में मिलने वाले शासकीय मुआवजे के दावों का भुगतान कागजों बिना रुक गया है।
अव्यवस्था पर फूटा आमजन का दर्द
- ग्राम मुड़ीपार बिल्हा निवासी उत्तम दास ने बताया कि 23 जुलाई से बच्चों के जाति प्रमाण पत्र के लिए 1954-55 के बी-1 और खसरे की नकल लेने आ रहा हूं। दो महीने से ज्यादा समय बीत गया, पर हर बार टिकट न होने की बात कहकर टाल दिया जाता है। अब टिकट आ गया है तो लिपिक फाइल दबाकर बैठे हैं।
- ग्राम भनेसरा मस्तूरी निवासी डोहर प्रसाद टंडन का कहना है कि 24 अगस्त को मिसल की नकल के लिए रसीद कटवाकर आवेदन जमा किया था। दो माह से लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहा हूं। बार-बार यही कहा जाता रहा कि टिकट नहीं है। अब कागज तैयार होने के बाद भी काउंटर से नहीं दिया जा रहा। बार-बार आने-जाने में भारी किराया और समय दोनों बर्बाद हो रहा है।
- बिलासपुर निवासी अंकित मोदी ने कहा कि उन्होंने 30 जून को जरूरी नकल प्रतिलिपि के लिए आवेदन दिया था। पिछले तीन महीने से लगातार चक्कर लगा रहा हूं। कलेक्टर साहब से मिलने के बाद पता चला कि स्टांप टिकट तो आ गए, लेकिन नकल शाखा की खिड़की पर जो लिपिक बैठते वे लोगो को लगातार टिकट न होने की बात कहते गुमराह कर रहे है। इतनी सामान्य प्रतिलिपि के लिए महीनों दौड़ाना सीधे तौर पर व्यवस्था की संवेदनहीनता और लापरवाही है।
वर्जन:
नासिक से मुख्यालय से स्टांप टिकटों की खेप प्राप्त हो चुकी है। स्टाक मिलान के बाद नकल शाखा व अधिकृत वेंडरों को टिकट आवंटित किए जा रहे हैं। नासिक से अभी और टिकट आने वाले है। टिकट प्राप्त होते ही काउंटर पर वितरण प्रक्रिया तुरंत सुचारू करने और आवेदकों को बिना विलंब दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।
संजय अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर