
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कंप्यूटर साइंस विभाग के बीएससी षष्ठम सेमेस्टर के छात्र प्रज्ज्वल माटोलिया और आदित्य गुप्ता ने ऐसा स्मार्ट हथियार सुरक्षा सिस्टम विकसित किया है, जो बंदूक की हर पल लोकेशन बताएगा और आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत अधिकारी उसे दूर से ही निष्क्रिय भी कर सकेंगे। आईओटी आधारित इस मॉडल को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश से आए वैज्ञानिकों ने सराहा और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए उपयोगी बताया।
छात्रों द्वारा विकसित आइओटी आधारित स्मार्ट फायरआर्म ट्रैकिंग एवं रिमोट डीएक्टिवेशन सिस्टम जीपीएस, जीएसएम और ईएसपी-8266 तकनीक पर आधारित है। यह सिस्टम हथियार की रियल-टाइम लोकेशन लगातार वेब प्लेटफॉर्म पर भेजता रहता है। यदि किसी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं हो, तो सिस्टम लोकेशन को सुरक्षित रूप से मेमोरी में संग्रहित कर लेता है और नेटवर्क मिलते ही पूरी जानकारी स्वतः अपलोड कर देता है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत रिमोट डीएक्टिवेशन है।
उदाहरण के लिए यदि किसी पुलिसकर्मी की बंदूक अपराधी छीन ले या सेना का हथियार किसी आतंकवादी के हाथ लग जाए, तो अधिकृत कंट्रोल रूम से उसे तुरंत निष्क्रिय किया जा सकता है। हथियार चोरी होने या गलत हाथों में पहुंचने पर उसकी सटीक लोकेशन भी लगातार मिलती रहेगी, जिससे उसे जल्दी बरामद किया जा सकेगा। जेल सुरक्षा, वीआईपी सुरक्षा, पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी साबित हो सकती है। छात्रों के इस नवाचार की अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमेरिका, ओमान और मॉरीशस से आए विशेषज्ञों ने विशेष सराहना की और इसे भविष्य की स्मार्ट सुरक्षा प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
बंदूक में लगा जीपीएस उसकी स्थिति का पता लगाएगा, जबकि जीएसएम मॉड्यूल यह जानकारी इंटरनेट के माध्यम से वेब प्लेटफॉर्म तक पहुंचाएगा। यदि नेटवर्क उपलब्ध नहीं होगा तो सिस्टम डेटा को सुरक्षित रखेगा। नेटवर्क लौटते ही सभी रिकॉर्ड स्वतः अपलोड हो जाएंगे। इस तरह हथियार की लोकेशन का पूरा रिकार्ड सुरक्षित रहेगा और किसी भी समय देखा जा सकेगा।
यदि किसी अभियान के दौरान हथियार खो जाए, चोरी हो जाए या गलत व्यक्ति के हाथ लग जाए तो कंट्रोल रूम उसकी लोकेशन तुरंत देख सकता है। आवश्यकता पड़ने पर अधिकृत अधिकारी उसे दूर से ही निष्क्रिय कर देंगे। इससे हथियार का दुरुपयोग, आतंकवादी गतिविधियां, अपराध और दुर्घटनाओं की आशंका काफी हद तक कम की जा सकती है।
अटल विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने छात्रों के मॉडल का अवलोकन किया। विशेषज्ञों ने कहा कि इंटरनेट ऑफ थिंग्स आधारित ऐसी तकनीक आने वाले समय में स्मार्ट सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है। उन्होंने छात्रों की तकनीकी सोच, नवाचार और समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने की क्षमता की सराहना करते हुए इसे आगे विकसित करने की सलाह दी।
यह केवल एक छात्र परियोजना नहीं, भविष्य की स्मार्ट सुरक्षा प्रणाली की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इस तकनीक को और विकसित किया जाए तो पुलिस, सेना, अर्द्धसैनिक बल, जेल प्रशासन और अन्य सुरक्षा एजेंसियां हथियारों की वास्तविक समय में निगरानी कर सकेंगी। किसी हथियार के चोरी होने, खो जाने या अनधिकृत व्यक्ति के हाथ लगने की स्थिति में उसे दूर से निष्क्रिय किया जा सकेगा। इससे जनहानि रोकने, अपराध नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में बड़ी मदद मिल सकती है।-डा.एचएस होता, विभागाध्य क्षकंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय।