अविवाहित कर्मचारी के दत्तक पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग के दिवंगत अविवाहित कर्मचारी के दत्तक पुत्र विशाल साधवानी की अनुकंपा नियुक्ति की मांग को खारिज करने वाले हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति सरकारी नीति के अनुसार ही दी जा सकती है और दत्तक ग्रहण को कानूनी रूप से साबित नहीं किया जा सका।
Publish Date: Thu, 03 Sep 2026 10:24:13 PM (IST)Updated Date: Thu, 03 Sep 2026 10:24:13 PM (IST)
प्रतीकात्मक चित्रHighLights
- दो सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में हुई सुनवाई।
- सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा हाई कोर्ट का आदेश।
- छत्तीसगढ़ शासन के पक्ष में आया निर्णय।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ लोक निर्माण विभाग के दिवंगत कर्मचारी के दत्तक पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने से इन्कार करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
सुप्रीम कोर्ट ने दो सितंबर 2026 को कोरबा निवासी विशाल साधवानी (23) की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया और एसएलपी खारिज कर दी। हालांकि दाखिले में हुई देरी को सुप्रीम कोर्ट ने माफ कर दिया।
यह मामला दिवंगत कर्मचारी दीपक कुमार सिंधी के दत्तक पुत्र विशाल साधवानी से जुड़ा है। दीपक कुमार सिंधी लोक निर्माण विभाग में कार्यालय सहायक के पद पर कार्यरत थे और एक जून 2006 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। उस समय विशाल नाबालिग थे। बालिग होने के बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। विशाल के अनुसार, उनके पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के साथ सेवानिवृत्ति लाभ जारी करने के लिए भी आवेदन किया था।
विभाग ने शासन की नीति का दिया हवाला
विशाल ने 15 दिसंबर 2021 को फिर विस्तृत अभ्यावेदन दिया। विभाग ने दस्तावेज मांगे, जिन्हें उन्होंने जुलाई 2022 में प्रस्तुत किया। इसके बाद नौ मई 2023 के आदेश से उनकी अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया गया। विभाग का आधार था कि राज्य की 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के तहत दिवंगत अविवाहित कर्मचारी के दत्तक पुत्र को नियुक्ति का अधिकार नहीं है।
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हाई कोर्ट ने भी माना था सही
हाई कोर्ट ने पाया था कि विशाल वैध दत्तक ग्रहण को कानून के अनुरूप साबित नहीं कर सके। अदालत ने स्पष्ट किया था कि अनुकंपा नियुक्ति कोई निहित अधिकार नहीं है, बल्कि यह सरकारी नीति के अनुसार ही दी जा सकती है। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी है।