
कुत्तों का आतंक, अब गाय भी हो रही रैबीज का शिकार
बिलासपर। कुत्तों की संख्या बढ़ने का असर इंसानों पर ही नहीं पड़ रहा है बल्कि इसके कारण बड़ी संख्या में गाय भी रैबीज का शिकार हो रही है। आएदिन रैबीज से पीड़ित गाय को मोपका गोठान शिफ्ट किया जा रहा है। हो यह रहा है कि आवारा कुत्तों का झुंड सड़कों में विचरण करने वाले मवेशियों को भी अपना शिकार बनाते है, कुत्तों के झुंड एक साथ हमला करते है और एक साथ कई घाव देते है, जो समय के साथ सूख तो जाता है, लेकिन इनमे से कई रैबीज का शिकार हो जाती है। इसके बाद गाय में रैबीज का असर देखने लगा और लोगों पर हमला करने लगी। बीते एक साल के भीतर दर्जनों गाय कुत्तों के काटने की वजह से रैबीज से ग्रसित होकर असमय मौत का शिकार हो चुकी है।
शहर में 2020 तक आवारा कुत्तों की संख्या 5500 से 5800 तक के बीच रही। इसके बाद कोरोना काल चालू हो गया। कोरोना काल में इनके जनंसख्या नियंत्रण पर रोक लग गया और तीन साल के भीतर में इनकी संख्या बढ़कर 8500 से अधिक हो चुकी है। ऐसे में कुत्ते के काटने के मामले बढ़ चुके हैं। शहरी क्षेत्र में हर दिन कम से कम 15 से 20 मामले सिम्स व जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिन्हें उपचार मिल रहा है। वहीं कुत्ते अपना दूसरा शिकार गाय को बना रहे हैं। चोटग्रस्त गाय और उनके बच्चें इन कुत्तों के आतंक से नहीं बच पा रहे हैं, ऐसी गाय को एक साथ कई कुत्ते काट रहे हैं। वहीं उपचार के अभाव ये गाय आसानी से रैबीज का शिकार हो जा रहे हैं। बीच-बीच में इस तरह के मामले पशु चिकित्सालय में आ रहे है, जहां आवारा गाय के बीमार होने के दशा में लोग उन्हें अस्पताल पहुंचाते है, जहां चिकित्सक जांच में यह बात सामने आती है कि यह गाय तो रैबीज का शिकार हो चुकी है, इसे अब नहीं बचाया जा सकता है। साफ है कि इन्हें कभी न कभी आवारा कुत्ते ने काटा होता है। कुत्ते के काटने के कुछ दिनों बाद ही रैबीज का शिकार होने के बाद गाय उग्र हो गई है और आने जाने वालों के ऊपर हमला करने का भी काम करती है। जिसकी जानकारी निगम प्रबन्धन को भी दी जाती है। लेकिन रैबीज से ग्रसित गाय को मोपका गोठान में शिफ्ट कर खानापूर्ति कर ली जाती है और अंत में उस गाय की मौत हो जाती है।
उग्र हो चुके हैं कुत्ते, गाय आसान शिकार
ब्रीडिंग सीजन होने की वजह से कुत्ते कुछ ज्यादा ही उग्र हो गए हैं। जो इंसानों को तो काट रहे हैं। इसके अलावा मवेशियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। खासतौर से गाय सीधी व शांत होने की वजह से इनका आसान शिकार बन रहे हैं। जरा से घायल दशा में गाय के मिलने पर कुत्तों का पूरा झुंड का झुंड हमला कर दे रहा है। ऐसे में समय पर इलाज न मिलने पर इनका रैबीज से संक्रमित होना तय हो जा रहा है।
हर साल 50 से 60 गाय रैबीज से पीड़ित
पशु चिकित्सालय के मुताबिक इलाज के लिए पहुचने वाले गाय में हर साल 50 से 60 मामले में रैबीज की पुष्टि होती है। ये मामले है जो अस्पताल पहुचे है, इससे कही ज्यादा मामले तो अस्पताल ही नहीं पहुचते है। ऐसे में आंकलन है कि जिले स्तर पर बड़े पैमाने में गाय रैबीज का शिकार होकर असमय मौत का सामना कर रहे हैं।
सांड और बछड़े भी बनते है शिकार
ऐसा नहीं है कि आवारा कुत्ता सिर्फ गाय को अपने डाग बाइट का शिकार बना रहे है। वे सांड को भी नहीं छोड़ रहे है, ऐसे सांड जिनकी उम्र अधिक हो चुकी है और बीमार है, जो बेहद धीरे-चलते है, ऐसे में कुत्ते इन्हें भी काटते है। इसी तरह बछड़े को भी अपना शिकार बनाते है, बछड़े के कमजोर होने की वजह से पूरा झुंड का झुंड हमला कर देता है। ऐसे कई मामलों में बछड़ों की मौत तक हो जाती है।