
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। नाबालिग को बहला-फुसलाकर अगवा करने और बार-बार दुष्कर्म करने के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने अंबिकापुर स्थित त्वरित विचारण विशेष न्यायालय के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने माना कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी और अभियोजन ने अपहरण व यौन शोषण के आरोप संदेह से परे साबित किए हैं।
अभियोजन के अनुसार, आरोपित पीड़िता का दूर का रिश्तेदार था और कुछ समय तक उसके परिवार के साथ रहता था। 17 जनवरी 2017 को वह पीड़िता को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने तलाश शुरू की और 29 जनवरी 2017 को उसे आरोपी के कब्जे से बरामद किया।
पीड़िता ने बयान में आरोपी पर कई बार यौन शोषण करने, मारपीट करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए। उसके पिता, मां और चाचा के बयानों से भी अभियोजन के मामले को समर्थन मिला। आरोपित के वकीलों ने दलील दी कि पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए जिस स्कूल के अभिलेख पर भरोसा किया गया, उसमें जन्मतिथि पहले के स्कूल के स्थानांतरण प्रमाणपत्र के आधार पर दर्ज थी। इसलिए मूल अभिलेख के अभाव में उसे घटना के समय नाबालिग नहीं माना जा सकता।
बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि पीड़िता और आरोपी के बीच संबंध सहमति से थे तथा बयानों में विरोधाभास हैं। राज्य की ओर से दोषसिद्धि को सही ठहराया गया। हाई कोर्ट ने पाया कि पीड़िता की जन्मतिथि एक जुलाई 1999 स्कूल के प्रवेश रजिस्टर के साथ कक्षा पांचवीं और दसवीं की अंकसूचियों में भी दर्ज थी। पीड़िता के पिता ने भी अदालत में इसकी पुष्टि की थी।
घटना के दिन उसकी उम्र 17 वर्ष छह महीने से कुछ अधिक थी। पीठ ने कहा कि पीड़िता की गवाही विश्वसनीय है और उसके परिजनों व विवेचक के बयानों से इसकी पुष्टि होती है। नाबालिग की सहमति मान भी ली जाए, तब भी उसका कानूनी महत्व नहीं है।
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दस साल की सजा बरकरार
अंबिकापुर के विशेष न्यायालय ने 3 अगस्त 2022 को आरोपी को अपहरण, विवाह के लिए विवश करने के उद्देश्य से अपहरण और बार-बार दुष्कर्म के अपराधों में दोषी ठहराया था। उसे भारतीय दंड संहिता के तहत अधिकतम दस वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश था। हाई कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए अपील खारिज कर दी।