
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय में हड्डी रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डा. रविकांत दास (54), रायपुर को तबादले के खिलाफ दूसरी याचिका दायर करना भारी पड़ा। उन्हें 3 सितंबर 2026 को रायपुर से शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध अस्पताल, कोरबा स्थानांतरित किया गया था।
पहले मामले में हाई कोर्ट ने 23 सितंबर को उनके अभ्यावेदन पर सक्षम अधिकारी को निर्णय लेने कहा था, लेकिन तबादले पर रोक नहीं लगाई थी। इसके अगले दिन 24 सितंबर को उन्हें कार्यमुक्त कर कोरबा में पदभार ग्रहण करने का आदेश जारी हुआ। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु ने कहा कि कार्यमुक्त किए जाने से तबादले के खिलाफ नया मुकदमा करने का अधिकार पैदा नहीं होता। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
पहले भी चुनौती दे चुके थे तबादले को
डा. दास ने 3 सितंबर के तबादला आदेश को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने 23 सितंबर को याचिका का निराकरण करते हुए उन्हें अपना अभ्यावेदन आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी। साथ ही सक्षम अधिकारी को अभ्यावेदन पर कानून के अनुसार और उसके गुण-दोष के आधार पर विचार कर निर्णय लेने कहा था। डा. दास का कहना था कि अभ्यावेदन अभी लंबित था, इसके बावजूद उन्हें 24 सितंबर को कार्यमुक्त कर कोरबा जाने का आदेश दे दिया गया। इसलिए उन्होंने कार्यमुक्ति आदेश के साथ फिर उसी तबादले को चुनौती दी।
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शासन ने कहा- पहली याचिका में कोई रोक नहीं थी
शासन की ओर से बताया गया कि 23 सितंबर का हाई कोर्ट आदेश शासन के संबंधित विभाग को 25 सितंबर को मिला, जबकि कार्यमुक्ति आदेश 24 सितंबर को ही जारी हो चुका था। पहली याचिका में कोर्ट ने न तो तबादले पर रोक लगाई थी और न ही अभ्यावेदन के निराकरण के लिए कोई समय-सीमा तय की थी। इसलिए नई याचिका विचार योग्य नहीं है।
कोर्ट ने कहा- रिलीविंग से नया मामला नहीं बनता
हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि पहली याचिका में चुनौती का मुख्य आधार वही 3 सितंबर का तबादला आदेश था, जिसे अब फिर चुनौती दी जा रही है। 23 सितंबर के आदेश में केवल अभ्यावेदन पर निर्णय लेने का निर्देश था। तबादले को लागू करने से रोकने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बाद में कार्यमुक्त किए जाने की कार्रवाई को उसी तबादला आदेश के खिलाफ नई याचिका का नया आधार नहीं बनाया जा सकता। इस आधार पर अदालत ने दूसरी याचिका को विचार योग्य नहीं माना और उसे खारिज कर दिया।