
नईदुनिया प्रतिनिधि. बिलासपुर। पत्नी की पदस्थापना कोरबा जिले के दीपका में होने के बावजूद सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी कमलेश कुमार तंवर का तबादला करीब 400 किलोमीटर दूर कोंडागांव जिले के माकड़ी किए जाने के मामले में हाई कोर्ट ने राहत दी है।
जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने तबादला आदेश और उसी दिन जारी कार्यमुक्ति आदेश पर रोक लगा दी है। यह रोक राज्य सरकार की स्थानांतरण नीति के तहत गठित समिति के अभ्यावेदन पर निर्णय लेने तक प्रभावी रहेगी।
कमलेश कुमार तंवर ने याचिका में बताया कि वे सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए थे और लगातार इसी पद पर काम कर रहे हैं। बाद में उन्हें कोरबा में प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई। 3 नवंबर 2026 को जारी आदेश से उनका तबादला कोरबा से माकड़ी, जिला कोंडागांव कर दिया गया। इसी दिन उन्हें कार्यमुक्त भी कर दिया गया।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उनकी पत्नी सरकारी कर्मचारी हैं और दीपका, कोरबा में पटवारी के पद पर पदस्थ हैं। राज्य की स्थानांतरण नीति की कंडिका 3.13 में पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर यथासंभव एक ही स्थान पर पदस्थापना का प्रावधान है। उन्होंने इस संबंध में अभ्यावेदन भी दिए थे।
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यह भी आरोप लगाया कि कोरबा में जितेंद्र कुमार साहू को विकासखंड शिक्षा अधिकारी बनाए जाने को चुनौती देते हुए उन्होंने पहले ही हाई कोर्ट में अलग याचिका दायर की थी। इसके बाद उनका तबादला किया गया।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि उनकी जगह किसी अन्य कर्मचारी की पदस्थापना नहीं की गई और नीति के अनुसार कार्यमुक्त करने के लिए 10 दिन का समय दिए जाने के बजाय उसी दिन कार्यमुक्त कर दिया गया। राज्य सरकार की ओर से तबादले को प्रशासनिक आवश्यकता बताते हुए याचिका का विरोध किया गया।
शासन ने कहा कि पति-पत्नी की अलग-अलग पदस्थापना से जुड़ी शिकायत पर स्थानांतरण नीति की कंडिका 8 के तहत गठित समिति के सामने अभ्यावेदन दिया जा सकता है।
समिति 20 दिन में करेगी निर्णय
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को आदेश की तारीख से सात दिन के भीतर समिति के समक्ष अभ्यावेदन देने की अनुमति दी है। समिति को अभ्यावेदन मिलने के 20 दिन के भीतर कानून और स्थानांतरण नीति के अनुसार निर्णय लेना होगा। अदालत ने तबादले के पीछे दुर्भावना के आरोप और पहले से लंबित याचिका को ध्यान में रखते हुए समिति के निर्णय तक याचिकाकर्ता से संबंधित तबादला और कार्यमुक्ति आदेश पर रोक लगा दी। इन निर्देशों के साथ याचिका का निराकरण कर दिया गया।